उज्जैन की जीवनदायिनी नदी शिप्रा

उज्जैन की शिप्रा नदी

Shipra River In City Of Ujjain

मुख्यत: उज्जैन  में बहने वाली नदी शिप्रा उनके लिए जीवन दायिनी है | उन्हें दैनिक उपयोग का जल यही नदी सुलभ कराती है |

शिप्रा नदी गंगा यमुना सरस्वती की तरह पवित्र और महिमा वाली नदी है | हर 3 साल में इसके तट पर कुम्भ मेले का आयोजन उज्जैन में होता है | इस नदी के तट पर कई मंदिर और घाट बने हुए है | मुख्य घाटो में राम घाट , मंगलनाथ घाट , त्रिवेणी घाट , नरसिंह घाट और सिद्धनाथ घाट प्रमुख है |

शिप्रा नदी उज्जैन में

कैसे उत्पन्न हुई माँ शिप्रा :

इस नदी की उत्पत्ति के पीछे एक पौराणिक कथा है | कहते है एक बार भगवान शिव विष्णु जी के पास ब्रह्म कपाल लेकर भिक्षा मांगने गये | भगवान विष्णु ने भिक्षा देते समय उन्हें अपनी ऊँगली दिखा दी जिससे रूद्र शिव क्रोधित हो गये और अपने त्रिशूल से उन्होंने उनकी उस ऊँगली को काट दिया |


कटी हुई ऊँगली से रक्त प्रवाह हुआ और वे बुँदे उज्जैन के पास गिरी जिससे शिप्रा नदी बनी | प्राचीनकाल में इसकी धार बहुत तेज थी इसी कारण इसका नाम शिप्रा रखा गया |

सिंहस्थ कुम्भ मेला :

पौराणिक कथा  समुन्द्र मंथन  के दौहरान यहा भी  कुछ बुँदे अमृत की गिरी थी और इसी कारण यहा भी कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है | करोडों श्रध्दालु स्नान करने देश विदेश से माँ शिप्रा के किनारे आते है | स्कन्द पुराण में भी इस नदी की महिमा का वर्णन किया गया है जो की चम्बल में मिल जाती है |

ज्ञान और तपस्या की स्थली है शिप्रा :

इसी  नदी की किनारे सांदीपनी आश्रम में भगवान श्री कृष्णा ने अपने भाई बलराम और सखा सुदामा के साथ ज्ञान अर्जित किया था | गुरु गोरखनाथ और  राजा भर्तृहरि की यह तपो भूमि रही है |

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