शिव महापुराण

शिव महापुराण

18 महापुराणो में शिव महापुराण को सर्वोपरि बताया गया है | यह पुराण ही सभी महापुराणो का सार है | इस पुराण का चेतन पाठ करने से सभी पापो का अंत हो जाता है | मन शिवमय होकर शिव भक्ति और शिव लीला में लीन हो जाता है | हम सभी यह तो जानते है की शिवजी को संहारकर्ता कहा जाता है | पर यह भी आप जानते है की शिवजी भोले नाथ भी है | इनका कल्याणकारी स्वरूप , सदा जीवन और जल्द प्रसन्न होने वाला रूप इन्हे सर्वोपरि बनाता है |

इस पुराण में इन्ही आशुतोष शिवशम्भू को केन्द्रित करके उनके स्वरूप , महिमा, कथाये और उनकी लीलयो का बड़े ही सुन्दर तरीके से वर्णन किया गया है | यह पुराण शिव आराधना और पूजा का विस्तृत वर्णन करता है | महा शिव का गुणगान ही इस पुराण का अमृत सार है | महान शिव , भोले शिव , दयालु और कल्याणकारी शंकर और बुराई के लिए रूद्र शिव से हम इस महापुराण से साक्षात्कार कर सकते है | शिव प्रिया पार्वती और उनके पुत्रो से जुडी कथाये भी इसी पुराण में ही आती है |

शिव के जगत कल्याण के लिए गये अवतार और उनके बारह महा ज्योतिर्लिंगों के बारे में भी यह पुराण विस्तृत जानकारी देती है |

शिव में अशीम विश्वास रखने वाले और उनके ही सर्वोपरि मानने वाले शैव मत वालो के लिए शिव महापुराण ही सब कुछ है | सहज प्रसन्न वाले शिव को पाना उनकी भक्ति और उनकी महिमा का गान करने से ही संभव है | और इस पुराण को शिव चरित्र कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी |

शिव पुराण का रूप :

इस पुराण में लगभग 25,000 श्लोक है तथा यह क्रमश: 6 खण्डो से बनी है

  • विद्येश्वर संहिता
  • रुद्र संहिता
  • कोटिरुद्र संहिता
  • उमा संहिता
  • कैलास संहिता
  • वायु संहिता

शिव महापुराण की महिमा :

शिव पुराण से शिव के अति नजदीक जाया जा सकता है |

इस पुराण का पाठ करना और सुनना सभी फलो को देना वाला है |

शिव कृपा से भक्त शिवपद को प्राप्त करता है |

कहा जाता है की इस महापुराण का पाठ करने से या सुनने से ही मनुष्य सभी पापो से मुक्त हो जाता है | यदि यह पाठ सावन मॉस में किया जाये तो कथा का महात्म्य कई गुना बढ़ जाता है | शिव अनादि और अजन्मे है |

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