बृहस्पतिवार (गुरूवार ) व्रत की पूजन विधि सत्यनारायण की

गुरूवार व्रत और पूजन विधि

गुरूवार का दिन भगवान सत्यनारायण का दिन माना जाता है जो की भगवान विष्णु का ही एक रूप है |  इन्हे जगत के पालनहार माना जाता है | जिन भक्तो पर इनकी कृपा है उन्हें कभी अन्न धन की कमी नही होती है | सप्ताह में आना वाला गुरूवार (बृहस्पतिवार) भगवान विष्णु का माना जाता है | इस दिन विधि विधान से पूजा अर्चना और व्रत करने से विष्णु जी प्रसन्न होते है |


गुरूवार व्रत विधि

केले के पौधे की होती है पूजा

हिन्दू धर्म में पवित्र और धार्मिक पौधो में केले के पौधे को भी स्थान प्राप्त है | इस दिन गुरूवार के दिन विशेष रूप से इसकी पूजा की जाती है | इसे बृहस्पति देवता का प्रतिक मानकर पूजा की जाती है | धन, विद्या, पुत्र और इच्छित फल की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत अत्यंत कल्याणकारी है |

पीले रंग का विशेष महत्व


इस व्रत की मुख्य बात यह है की की इस दिन पूजा व्रत करने वाले को पीले रंग का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए | नहाने के बाद वस्त्र भी पीले रंग के और खाने में भी पीली चीजो का सेवन करना चाहिए | पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है |

कैसे करे गुरूवार की पूजा और व्रत

सूर्योदय से पहले उठे और नहा ले और सूर्य देवता को जल से अर्ध्य दे |
अब पीले रंग के वस्त्र धारण करे |
अब जल में हल्दी डालकर केले के पेड़ को सींचे ।

भगवान सत्यनारायण की फोटो को केले के तने के सहारे रखे |
केले के पेड़ की जड़ो में चने की दाल और मुन्नके चढ़ाये।
बृहस्पति देव की कथा सुने |
इसके बाद घी का दीपक जलाकर उस पेड़ की आरती करें।
व्रत के दौरान पुरे दिन उपवास रखे या सिर्फ एक समय भोजन करे |
भोजन में चने की दाल या पीले रंग की वस्तुओ का सेवन करे ।
इस दिन मंदिरों में केले के फल का दान करे |

Note : नमक का इस दिन खाने में उपयोग नही करना चाहिए |

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