माँ कवलका मंदिर

माँ कवलका मंदिर में देवी करती मदिरापान

मदिरा पान करने वाले काल भैरव का मंदिर तो विश्व प्रसिद्द है , इन्ही के साथ साथ एक देवी मंदिर ओर भी ऐसा है जहा देवी माँ भक्तो द्वारा चढ़ाई मदिरा का पान करती है | यह  मंदिर  रतलाम शहर से लगभग 32 किमी की दूरी पर  सातरूंडा गाँव में  स्थित है । यहा माँ माता कवलका नाम से भक्तो में प्रसिद्द है | ऐसे चमत्कारों को देखकर माँ में आस्था और श्रद्दा और अधिक बढ़ जाती है | दूर दूर से भक्त माँ के दर्शन करने और अपना प्रसाद चढ़ाने आते है | कहते है माँ मदिरा पान करने भक्तो की उचित मुरदे पूर्ण करती है |



इस मंदिर में माँ कवलका, के साथ काल भैरव , काली माँ और भगवान शिव विराजमान है |

यहा सिर्फ अकेली ही माँ कवलका मंदिर पान नही करती बल्कि इनके साथ साथ माँ काली  और भैरवनाथ भी यह मदिरा पीते है | मदिरा का प्याला होठो पर लगते ही प्याला खाली हो जाता है | प्रसाद के रूप में बोतल में बची मदिरा भक्तो में बाँट दी जाती है |

भुत प्रेत से प्रभावित मनुष्यों का भी इस मंदिर में इलाज किया जाता है , भक्त अपने अपने तरीके से माँ के धोक लगाने आते है | कोई पेट के बल तो कोई नंगे पग इस मंदिर की यात्रा करते है | भक्तो का जमघट नवरात्री और हरियाली अमावस्या पर अधिक होता है |

मंदिर ३०० साल पुराना बताया जाता है और माँ मदिरा प्रसादी मंदिर निर्माण के समय से ही कर रही है | यहा आकर सुनी गोदे भर जाती है और फिर भक्त यहा बलि और अपने नव बच्चे के बाल उतारकर मानता को पूर्ण करते है |



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