अबूझ सावे कब कब आते है

अबूझ सावे शुभ दिन विवाह के

अबूझ सावे ऐसे दिन होते है जिनपे बिना पंडित को पूछे  और पंचांग को देखे मांगलिक कार्य संपन्न किये जाते है | ये दिन स्वयं सिद्ध होते है और इन दिनों को अति शुभ माना जाता है |

आइये जाने की कब कब यह अबूझ सावे के दिन आते है |
विवाह मुहूर्त
१) बसंत पंचमी : माँ सरस्वती के जन्म का दिन बसंत की पंचमी को आता है और शुभ मुहूर्त का दिन माना जाता है |

२) फुलेरा दोज : फाल्गुन की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को फूलेरादूज मनाई जाती हैं | इसे शुभ दिन माना जाता है और बिना विध्न के विवाह रचाए जाते है |

३) रामनवमी : भगवान राम के जन्म का दिन राम नवमी पर भी अबूझ मुहूर्त  माना जाता है और विवाह करवाए जाते है |

४) जानकी नवमी : मिथिला नरेश जनक की पुत्री सीता (जानकी ) जिनका विवाह भगवान राम के संग हुआ था , उनका यह जन्म दिवस है | यह दिन भी अबूझ मुहूर्त का होता है | 

५) पीपल पूर्णिमा :  यह दिन चमत्कारी और पवित्र दिनों में से एक माना जाता है | इसे  बुद्धपूर्णिमा भी कहा जाता है | यह वैशाख मास की पूणम को आती है |

६) गंगा दशमी : गंगा दशहरा भी पवित्र दिनों में से एक है | यह ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को आती है | इस दिन यह नदी स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी |

७) भदल्या  नवमी : विवाह के लिए उत्तर भारत में यह अबूझ मुहूर्त माना जाता है | यह आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को आती है जिस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन होता है |

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