सीता नवमी | जानकी जयंती पर जाने माँ सीता से जुडी रोचक बाते

माँ सीता से जुडी कुछ रोचक बाते

*जिस दिन माँ सीता का धरती पर प्राकट्य हुआ वो दिन सीता नवमी जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है | यह  वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आता है |
* माँ सीता को धरती की पुत्री कहा जाता है क्योकि इन्होने किसी महिला के गर्भ से जन्म ना लेकर धरती से उत्पन्न हुई थी | राजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ करना चाहते थे और इसके लिए वे भूमि को जोत रहे थे तब उन्हें एक नवजात बालिका धरती से प्राप्त हुई |

सीता नवमी 2019 डेट्स

इस साल 2019 में सीता नवमी 13 मई सोमवार को आ रही है |

sita se judi rochak baate

 



* इस कन्या को राजा जनक ने अपनी पुत्री की तरह पाला और इनका नाम जानकी , जनक नंदनी रखा गया |

*’अद्भुत रामायण’ में उल्लेख है कि रावण कहता है कि- “जब मैं भूलवश अपनी पुत्री से प्रणय की इच्छा करूँ, तब वही मेरी मृत्यु का कारण बने।” रावण के इस कथन से ज्ञात होता है कि सीता रावण की पुत्री थीं |

*वाल्मीकि रामायण से जब श्री राम से सीता का विवाह होता है तब वे सिर्फ छ: वर्ष की थी | यह विवाह पंचमी के नाम से जानी जाती है |

*माँ सीता शक्ति का प्रतिक थी यह बात रावण अच्छी तरह जानता था | इसी कारण सीता हरण के बाद लंका में उन्होंने पुरे सम्मान के साथ सीता माता को रखा और जोर जबरदस्ती की कोशिश तक नही की |

* रावण की मृत्यु का कारण माँ सीता ही बनी क्योकि बिना रावण की हत्या के श्री राम उन्हें लंका से मुक्त नही करवा सकते थे |sita ashok vatika

 



*अयोध्या लौटने पर कुछ नगरवासियों ने सीता जी के चरित्र पर सवाल उठाये क्योकि वे सालो तक रावण की लंका में रही |

*मजबूर होकर अयोध्या नरेश श्री राम को उनका त्याग करना पड़ा |

* श्री राम से दूर होकर माता सीता ने वन में वाल्मीकि जी संत के यहा शरण ली और वनवासियों की तरह जीवन यापन करने लगी |

* कुछ दिनों बाद उन्हें पुत्र लव की प्राप्ति हुई | ईश्वर की अनोखी लीला के कारण वाल्मीकि जी ने कुशा से कुश को उत्पन्न किया जो भी राम सीता का पुत्र कहलाया | वाल्मीकि आश्रम में उन दोनों ने शास्त्र और शस्त्र विद्या सीखी |

* श्री राम के द्वारा अश्वमेध यज्ञ किया गया ।  इसमे एक अश्व को विचरण के लिए स्वतंत्र छोड़ा जाता था | और यदि कोई इस अश्व को पकड़ लेता तो उसे राम की सेना से युद्ध करना पड़ता था |  लव और कुश ने उसे पकड़ लिया। और फिर श्री राम की सेना जिसमे भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमान सहित सभी महाबलियो को लव कुश से हार का सामना करना पड़ा | आखिर में जब राम खुद युद्ध के लिए पहुंचे। तब सीता के आ जाने से पूरी कथा की धारा बदल गई।

* श्री राम को उनके पुत्र समाकर माता सीता अपनी धरती माँ में फिर से समा गयी |

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