शिव पुराण कथा से जुड़े 10 नियम

Shiv Puran Ki Katha Padhte Samay Dhyan Rakhe 10 Niyam

10 Rules during Shiv Puran Katha : भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने वाला महाग्रन्थ शिव महा पुराण में कई भोलेनाथ से जुडी कथाये आई है । इस पुराण का पाठ आपको शिव धाम में ले जाने में सहायक है । शैव भक्तो के लिए यह किसी गीता से कम नही है । यह पापो का नाश करनी वाली और आध्यात्मिक सुख देने वाला ग्रन्थ है | शिव पुराण कथा के हर अध्याय में लीलाधर की लीलाओ का वर्णन है | शिव पुराण कथा नियम


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शिव पुराण कथा से जुड़े 10  नियम

 

पहला नियम

जो भी शिव भक्त यह कथा का पाठन करना शुरू करते है , उन्हें कथा वाचन के दिनों में केश और नाखुन नही कटवाने चाहिए । उन्हें कथा आरम्भ करने से पहले ही यह कार्य कर लेना चाहिए ।

दूसरा नियम

ऐसा भोजन ना करे जो देर तक नही पचे । आप बांसी खाने और मसूर की दाल का सेवन ना करे ।

तीसरा नियम


शिव पुराण की कथा सुनने और वचने वाले को ब्रह्मचर्य के नियमो का पालन करना चाहिए । उन्हें कथा के अंत में ही भोजन करना चाहिए और रात्रि में धरा पर ही सोना चाहिए ।

चौथा नियम

महापुराण कथा को रूचि और शिव भक्ति के साथ सुने । कथा के बीच में अनावश्यक बाते ना करे और ना ही उठे ।

पांचवा नियम

शिव के गुणगान करती हुई कहानी को अकेले में मनन करे , ऐसे दूसरे भक्तो को सुनाये और शिव भक्ति की गंगा में दुसरो को भी नहलाये । यह अति पूण्य का कार्य है ।

छठा नियम

जिन्होंने कथा का व्रत धारण किया हो उन्हें अपने गुस्से और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिये ।
किसी की निंदा और कठोर वचन ना बोले ।

सातवा नियम

जब भी कथा करे , सबसे पहले शिव महापुराण को सिर से लगाये । कोई भूल चूक हुई हो तो भोलेनाथ से उसके लिए क्षमा मांगे । इस पुराण को लकड़ी की पट्टिका पर रख कर पाठ करे ।

आठवा नियम

तामसिक भोजन और नशे के सेवन से दूर रहे | जैसा भोजन होगा , वैसे आपके विचार होंगे | इसी कारण सादा और पौष्टिक भोजन ग्रहण करे |

नौवा नियम

कथा समाप्त हो जाने पर भूखे व्यक्तियों को भर पेट भोजन कराये | जरुरतमंदों को दान दक्षिणा दे |

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दसवा नियम

सावन मास शिव भक्ति के लिए सबसे उत्तम है अत: ध्यान रखे यदि आपने कथा इस महीने शुरू की है तो इसका फल कई गुणा मिलता है |

 

 

 

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