श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा की महिमा और दर्शनीय स्थल

श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा की महिमा और महत्व

मथुरा कृष्ण जन्मस्थली है और उत्तरप्रदेश का एक जिला है | विष्णु के अवतार श्री कृष्ण भारत की जिस भूमि पर जन्मे वो मथुरा की | उनके मामा कंस ने उनकी माँ देवकी और पिता वासुदेव को कारागार में कैद कर रखा था | जब देवकी और वासुदेव के आठवा पुत्र जन्म लिया तब कारागार के ताले अपने आप खुल गये | सभी सैनिक मूर्छित हो गये और वासुदेव ने नन्दगाँव में जाकर यह पुत्र नन्द बाबा को सौफ दिया |


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मथुरा वासी कहते है तीनो लोक से न्यारी मथुरा नगरी हमारी |

मथुरा में दर्शनीय स्थल और मंदिर

कृष्ण जन्मभूमि मंदिर : 


मान्यता है की यह मंदिर उसी जगह बना हुआ है जिस जेल में कृष्ण का जन्म हुआ था | मंदिर परिसर में भी एक जेलनुमा संरचना बनाई गयी है | यह मंदिर मुस्लिम शासको द्वारा कई बार तोडा गया है |औरंगज़ेब के समय इस मंदिर के पास ही मस्जिद बनाई गयी जिससे की लोगो का ध्यान दूर हो  |mathura krishn janm

केशव मंदिर : यह मथुरा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है | यह 1600 के आस पास बना जो लाल पत्थर और चूने से बनाया गया है |

पोतरा कुण्ड :

श्रीमद् भागवत भवन : यह एक विशाल मंदिर है जिसमे  श्री राधा कृष्ण, श्री लक्ष्मीनारायण एवं जगन्नाथजी की अद्भुत और मनोहारी प्रतिमाये है | यहा शिवलिंग भी पारे से बना हुआ है | अन्य देवी देवताओ में माँ दुर्गा  एवं हनुमान जी की भी मूर्तियाँ स्थापित है। विद्युत से संचालित कृष्ण लीलाओ  मूर्तियों से श्री कृष्ण लीलाओं के बड़े ही सुन्दर व मनोहारी दर्शन कराए जाते हैं। श्रावण मास व भाद्रपद मास में यहाँ बड़ा भारी मेला लगता है। श्रीकृष्ण जन्म का समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है एवं रास लीलाएँ कई दिनों तक होती हैं। क्वार के महीने में यहाँ के रंगमंच पर श्री राम लीलाएँ कई दिनों तक होती हैं। क्वार के महीने में यहाँ के रंगमंच पर श्री राम लीलाएँ होता हैं। ट्रस्ट द्वारा श्रीकृष्ण संदेश नामक पत्रिका एवं अन्य ग्रन्थों का प्रकाशन भी किया जाता है।

श्री द्वारिकाधीश मंदिर :


गुजराती वैश्य श्री गोकुलदास पारिख ने द्वारिकादिश मंदिर की तरह यहा मंदिर का निर्माण करवाया | यहा सावन में हिन्जोले लगाये जाते है | जन्माष्टमी, होली, अन्नकूट आदि प्रमुख उत्सव हैं। श्री द्वारिकानाथजी की एक दिन में आठ बार झाँकियाँ होती हैं। चार बार प्रात:- मंगला, श्रृंगार, ग्वाल एवं राजभोग तथा चार बार सायं- उत्थान, भोग, संख्या आरती एवं शयन। पढ़े : रहस्यमयी वृंदावन का निधिवन – आज भी राधे संग रास रचाते है कृष्ण

दशभुजी गणेश मन्दिर

श्री द्वारिकाधीश मंदिर के पीछे गली में दश भुजा धारी  गणेश जी का मंदिर है |

श्री नाथजी का मन्दिर

मानिक चौक में ही श्री नाथजी का भव्य प्रतिमा वाला मन्दिर का निर्माण कुल्लीमल वैश्य जी द्वारा कराया गया है | इस मंदिर में  पाषाण की जाली-झरोखों से मंदिर को सुन्दर बनाया गया है ।

बिड़ला मन्दिर

यह वृन्दावन सड़क पर बिड़ला द्वारा बनवाया गया है। मन्दिर में पंञ्चजन्य शंख एवं सुदर्शन चक्र लिए हुए श्री कृष्ण भगवान, सीताराम एवं लक्ष्मीनारायणजी की मूर्तियाँ बड़ी मनोहारी हैं। दीवारों पर सुन्दर चित्रकारी  एवं उपदेशों की रचना की गयी है | गीता के श्लोक भी दीवारों पर सुंदर तरीके से लिखे गये है |

श्री यमुना मन्दिर एवं विश्राम घाट

यह मथुरा नगरी के मध्य में है | जिसमे उत्तर में बारह और दक्षिण में भी 12 घाट है | यहा यमुना जी का मंदिर है | एक बार ओरछा के राजा वीरासिंह जी ने यहा 81 मण सोने का दान किया था | इन सुन्दर घाटो पर भक्त नौका विहार का भी आनंद लेते है |

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