चक्रतीर्थ सरोवर में गिरा था ब्रह्मा द्वारा रचित चक्र

धर्म तप के लिए सबसे पवित्र तीर्थ

भारत भूमि सतयुग से ऋषि-मुनियों की धरती कहलाती  है। हर युग में देवताओ ने यहा अवतार लेकर इस भूमि को पावन किया है | यहा पवित्र नदियाँ और धार्मिक पर्वत उत्तर से दक्षिण तक फैले हुए है | यहा हर क्षेत्र में आपको तीर्थ स्थल मिल जायेंगे । हिन्दू सनातन धर्म वेदों और पुराणों पर आधारित है जो ईश्वर की पवित्र वाणी है | भारत की सनातन संस्कृति में नैमिषारण्य अत्यंत पवित्र धाम के नाम से जाना जाता है। इस तीर्थ का वर्णन बहुत सारे धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में गोमती नदी के तट पर ये अवस्थित है।

ब्रह्मा जी का चक्र - चक्रतीर्थ सरोवर

यह जगह भूतकाल में महान साधू संत ऋषियों की साधना स्थली रहा है | मनु-शतरूपा जैसे प्रख्यात साधको ने यहा हजारो वर्ष तपस्या करके इसे अति पावन तीर्थ स्थल बना दिया है | इसी धरती पर महादानी दधीचि ने अपनी अस्थियां धर्म की रक्षा के लिए दान की थी जिससे की महाशक्तिशाली अस्त्र शास्त्र का निर्माण हो सके |

पढ़े : पुराणों से जाने भारत के सबसे बड़े दानवीर कौन है

पुराण रचियता वेद व्यास जी ने यहा बैठकर कई पुराण लिखे है जो हमारे धर्म के आधार स्तंभ है |

धर्म तप की सबसे बड़ी जगह

शास्त्रों में बताई गई कथा के अनुसार, एक समय दैत्यों के भय से दुखी होकर ऋषिगण ब्रह्मा जी के पास जाकर विनती करने लगे की उन्हें ऐसे किसी पवित्र तीर्थ धाम के बारे में बताये जहा वे शांति से धर्म , तप और साधना कर सके | ऐसा स्थान जहा कोई भी दैत्य किसी भी तरह का विध्न नही डाल सके |

पढ़े : हिन्दू सनातन धर्म से जुडी पौराणिक कथाये और कहानियाँ

namisharnay tirth sthal

उनकी विनती सुन ब्रह्मा जी ने अपने तपोबल से सूर्य के समान तेजपूर्ण चक्र प्रगट किया। ब्रह्मा जी ने उन सभी साधुओ से कहा की यह दिव्य चक्र धरती के जिस स्थान पर समा जाये , वही वो स्थान है जिसके बारे में आप पूछ रहे है | अत: आप सभी अब इस चक्र का अनुसरण करे |

चक्र ने अपनी यात्रा शुरू की और उसके साथ साथ साधू संत भी उस पवित्र जगह की तलाश में पीछे पीछे चलते रहे |

यह चक्र एक पवित्र सरोवर में जाकर समा गया | वो स्थान नैमिषारण्य तीर्थ स्थल  ही था | तब से इस सरोवर का नाम चक्रतीर्थ  के नाम से प्रसिद्ध हुआ | ऐसा माना जाता है की आज भी इस सरोवर में पाताल लोक का अक्षय जल आता है |

Other Similar Posts

तीर्थराज प्रयाग की महिमा और दर्शनीय स्थल

इन बातो का जरुर ध्यान रखना चाहिए तीर्थ यात्रा में

साधू संत क्यों पहनते है गेरुए (भगवा ) रंग के कपड़े – जानिए इसका राज

तिथि अनुसार करे देवी देवताओ की पूजा

जाने क्या होती है आठ अष्ट सिद्धियाँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *