कन्या कुमारी यात्रा

कन्याकुमारी तीर्थ

कन्याकुमारी धार्मिक स्थल  की कहानी

Kanyakumari Temple India : कन्या कुमारी  अर्थात जो कन्या बिना शादी के रह गयी उसकी याद में यह स्थान कन्याकुमारी कहलाता है | यह कन्या पार्वती जी के लिए आया है |

इस स्थान की मान्यता के अनुसार उनकी भगवान शिव से शादी नही हुई है और शादी के लिए एकत्रित किये गये अनाज बिना पकाए रह गये जो बाद में पत्थर बन गये | इन्हे यात्रिगण आज भी देख सकते है |kanyakumari darshan

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भौगोलिक स्थती

कन्या कुँवारी तीर्थ  तमिलनाडु के दक्षिण में समुद्रतट पर स्थित है | यह भारत के सबसे दक्षिणतम में है |   यहा अरब सागर , हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी का संगम होता है | प्राकृतिक  सौन्दर्य से भरी यह जगह मन में अपार खुशियाँ भर देती है | रामेश्वरम् धाम से यह दुरी 300 किमी की है |  तिरुअनंतपुरम से यह लगभग 87 किमी की दुरी पर है और आसानी से बस मिल जाती है | चेन्नई से यह दुरी लगभग 700 किमी की है |

तीर्थ की सुन्दरता :

भारत के मुख्यत पर्यटक स्थलों में इसका भी नाम शामिल है | यह अपनी कला , सभ्यता और सुन्दरता के लिए आने वाले आगंतुको को मोह लेता है | सूर्य के उदय और अस्त होने के समय उसकी किरणे जो सागर के पानी में जो सुनहरी छटा बिखेरती है वो देखने आ अलग ही आनंद है |
कन्याकुमारी अद्भूत सौन्दर्य का प्रतीक है जहा दूर दूर तक दिखता समुन्द्र का पानी , अठखेलिया करती लहरे , सुनहरी रेत और मंद मंद भीनी भीनी चलती हवा आपको आनदं से भर देती है | समुन्द्र के बीचोबीच चट्टान पर बना विवेकानंद का स्मारक यादगार रहता है |

कन्या कुमारी में मुख्य दर्शनीय  स्थल :

कन्याकुमारी अम्मन मंदिर : पार्वती जी का यह मंदिर संगम पर बना हुआ है | मंदिर में दर्शन से पहले पास बने त्रिवेणी संगम में नहाया जाता है | अति सुन्दर और भव्यतम आभूषण से सुशोभित माँ पार्वती दिव्य दर्शन प्रदान करती है |

तिरुचेंदुर :

भगवान सुब्रमणम का यह मंदिर उनके छह निवासो में से एक माना गया है | यह बंगाल की खाड़ी के तट पर बना हुआ है |

कोरटालम झरना :

167 फीट का यह झरना दिव्य औषधीयो से युक्त है | यह कन्याकुवारी से 130 किमी की दुरी पर है |

उदयगिरी किला :

गुगनाथस्वामी मंदिर : एक हजार साल पुराना यह मंदिर चोल राजाओ ने बनवाया था | बहुत ही सुन्दर

सरकारी संग्रहालय : यहा कन्याकुवारी से जुड़े पुराने सिक्के  ,  लकड़ी का सामान , दक्षिण की कला और प्राचीन वस्त्रो के दर्शन होते है | यह प्राचीन कन्याकुवारी की गाथा गाता है | पर्यटक यहा आकर प्राचीन भारतीय संस्कर्ति की झलक पाते है |

गाँधी स्मारक : पीले रंग का भवन नुमा यह स्मारक अनूठी शिल्प कला का उदाहरण है | यही गाँधी का अस्थि कलश रखा हुआ है जिसपे सीधी सूर्य की किरणे पड़ती है | इसकी स्थापना १९५६ में की गयी है |

विवेकानंद स्मारक : सागर के मध्य एक चट्टान है |  कहते है इसी जगह पर विवेकानंद जी आकर चिंतन मनन करके ज्ञान प्राप्त किया करते थे | अब उनकी याद में यह स्मारक बनाया गया है | इसे देखने के लिए स्टीम या नाव का सहारा लिए जाता है | इनसे सागर में सवारी करना बड़ा आनंदित करने वाला सफ़र है |

तिरुवल्लुवर की प्रतिमा :133 फीट ऊँची यह प्रतिमा स्टेच्यु ऑफ़ लिबर्टी की तर्ज पर बनाई गयी है  | इसे बनाने में लगभग 5000 कारीगर लगे है | यह विवेकानंद स्मारक के करीब है |

कब जाएँ

यह एक समुद्र तटीय शहर है जो  मानसून  के समय घुमने लायक नही रहता | यह अवधि जून से सितम्बर तक की है | बाकी बचे महीने में आप यहा की यात्रा कर सकते है |

कैसे जाएँ

रेल मार्ग-

कन्याकुमारी रेल मार्ग द्वारा जम्मू, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, मदुरै, तिरुअनंतपुरम |

बस मार्ग-

चेन्नई, मदुरै, रामेश्वरम ,तिरुअनंतपुरम  आदि शहरों से कन्याकुमारी के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है।

वायु मार्ग-

कन्याकुमारी का निकटतम हवाई अड्डा तिरुअनंतपुरम में है। यहा मुख्य मेट्रो शहरो से सीधी हवाई यात्रा है |

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