ऋषिकेश के मंदिर

ऋषिकेश दर्शन

प्रकृति प्रेमियों के लिए ऋषिकेश स्वर्ग से कम नही  है। हरिद्वार में आने वाले यहा जरुर आते है |  ऊँचे पहाड़ , पहाड़ से निकलने वाली पवित्र गंगा , त्रिवेणी में संगम और राम और  लक्ष्मण झूले का आनंद आपको यहा बार बार आने के लिए प्रेरित करता है |

ऋषिकेश में दर्शनीय धार्मिक स्थल


लक्ष्मण झूला

गंगा नदी के एक किनारे  को दूसरे  किनारे  से जोड़ता यह झूला ऋषिकेश की विशिष्ट पहचान है।  पौराणिक मान्यता है की शेषनाग के अवतार लक्ष्मण ने गंगा नदी को पार करने के लिए सबसे पहले जूट की रस्सी  से इसका निर्माण किया था | इसके बाद मुख्य निर्माण  1939 में किया गया ।  यह 450 फीट लम्बा झुला है | इस झूले की तरह ही एक और अन्य राम झूला है | इन झूलो से गंगा नदी को पार करते समय रोमांचित सफ़र का आनदं उठाया जा सकता है | राम झूला शिवानंद और स्वर्ग आश्रम को जोड़ता  है।  इसे शिवानंद झूला भी पुकारा जाता है


त्रिवेणी घाट

ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट पर हिन्दुओ की माता तुल्य तीन नदियाँ मिलती है जो है गंगा, यमुना और सरस्वती | इनके संगम पर स्नान का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है | श्रद्धालु यहा स्नान करते है और संध्या में गंगा आरती में शामिल होते है |

स्वर्ग आश्रम

स्वामी विशुद्धानन्द द्वारा स्थापित यह आश्रम ऋषिकेश का सबसे प्राचीन आश्रम है। स्वामी जी को ‘काली कमली वाले’ नाम से भी जाना जाता था। इस स्थान पर बहुत से सुन्दर मंदिर बने हुए हैं। यहां खाने पीने के अनेक रस्तरां हैं जहां केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है। आश्रम की आसपास हस्तशिल्प के सामान की बहुत सी दुकानें हैं।

 पढ़े : विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत पाठ


नीलकंठ महादेव मंदिर

पौराणिक कथा के अनुसार इसी जगह पर भगवान शिव ने पर समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष का पान किया और नीलकंठ कहलाये थे | उन्ही की इस महा कारज के कारण इस मंदिर का नाम  नीलकंठ महादेव मंदिर रखा गया | मंदिर के आँगन में एक झरना है जिसमे भक्त नहाके भोले के दर्शन करते है |

इस मंदिर में भव्य चित्रण समुन्द्र मंथन का किया गया है जिसमे से निकलने वाले विष को नीलकंठ महादेव ग्रहण कर रहे है |

भरत मंदिर

भगवान श्री राम के भाई भरत को समर्पित यह मंदिर अति प्राचीन है जिसे आदि गुरू शंकराचार्य ने 12 सदी में बनवाया था | यह मंदिर विदेशी आक्रमण के दौरान  क्षतिग्रस्त हुआ | मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा  शालीग्राम के पत्थर पर बनी हुई है | साथ ही गुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित श्री यन्त्र के भी दर्शन होते है |

कैलाश निकेतन मंदिर

इस मंदिर में सभी देवी देवताओ की मुर्तिया विराजमान है | लक्ष्मण झूले से उतरते ही यह मंदिर आता है | 12 खंडो से बना यह मंदिर दुसरे मंदिरों से अलग है |

वशिष्ठ गुफा

संत वशिष्ठ राजा राम के पुरोहित थे | उनकी यह निवास स्थली थी | यहा अनेको संत साधू ध्यान मुद्रा  में देखे जा सकते है | यह गुफा 3 हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है और ऋषिकेश से २२ किमी की दुरी पर बद्रीनाथ जाने वाले मार्ग पर पड़ती है | यह ध्यान लगाने की पावन जगह है जहा संत वशिष्ठ का विशेष आशीष प्राप्त होता है |

गीता भवन

राम झुला पार करने पर आता है गीता भवन जिसमे रामायण और महाभारत के वर्तान्तो के चित्रों की अनुपम चित्रण दिखाई देता है | यहा प्रवचन सत्संग के कार्यक्रम होते रहते है | भक्तो को अपने भक्तिमय वातावरण के कारण चर्चा में बना रहता है | श्री जयदयाल गोयन्दकाजी ने 1950 में इसका निर्माण करवाया था | यही गीताप्रेस की एक शाखा से आप धार्मिक किताबे खरीद सकते है | रहने के लिए यहा सैकड़ो कमरे है |


रिवर राफ्टिंग का आनंद :

गंगा नदी पर आप रिवर राफ्टिंग का आनदं उठा सकते है | इसके लिए आपको पहले से ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन बुकिंग करानी होती है | यह उच्च रोमांचित यात्रा है |

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