उज्जैन के दर्शनीय स्थल और मंदिर

उज्जैन नगरी

उज्जैन नगरी मध्य प्रदेश की सबसे धार्मिक नगरी है | कैलाश  काशी के साथ साथ महादेव का वास उज्जैन को भी बताया जाता है | यहा महाकाल ज्योतिर्लिंग  के रूप में शिव दर्शन का भक्त लाभ उठाते है  | इसके अलावा पुरे उज्जैन क्षेत्र में 84 महादेव के मंदिर है | काशी नगरी के कोतवाल भैरव यहा भी जाग्रत अवस्था में काल भैरव मंदिर में विराजमान है |

उज्जैन (अवंतिका ) नगरी में मुख्य दर्शनीय धार्मिक स्थल और मंदिर


उज्जैन भी अति पौराणिक नगर है जिसका प्राचीनकाल में नाम अवंतिका था | यह मंदिरों का नगर है और यहा दर्शन करने के लिए बहुत सारे प्रसिद्ध मंदिर बने हुए है | यह लोग दर्शन के साथ साथ घुमने के लिए भी आते है |

महाकालेश्वर मंदिर

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर मंदिर भी एक है | यह ही एक ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहा सुबह भस्म से शिवजी की पूजा की जाती है | इस ज्योतिर्लिंग को इस धरती का केंद्र बताया  गया है |महाकाल की भस्म आरती सिर्फ इसी मंदिर में होती है |

श्री बडे गणेश मंदिर

श्री महाकालेश्वर मंदिर और  हरसिध्दि मंदिर के बीच वाले रास्ते पर पर श्री बडे गणेश जा का मंदिर है | यहा विशालकाय गणेशजी की मूर्ति मुख्य द्वार के दायी तरफ  विराजमान है |सिंदूरी रंग की इस प्रतिमा के चार हाथ है | अन्दर मंदिर परिसर में सप्तधातु की पंचमुखी हनुमान प्रतिमा खड़े रूप में है | कृष्णा भगवान कालिया नाग पर बंसी बजाते हुए खड़े है | यशोदा मैया द्वारा कान्हा को दूध पिलाने की मूर्ति भी यही है |  इसके साथ ही गणेश जी की अति प्राचीन मूरत भी इस मंदिर में लगाई गयी है |


चार धाम मंदिर :

उज्जैन में यह मंदिर हरसिद्धि माता के करीब ही है | यहा सभी चार धामों के दर्शन तुल्य प्रतिमा लगाई गयी है | मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले द्वारका धाम के भगवान द्वारकाधीश के दर्शन होते है फिर आगे बढ़ने पर रामेश्वरम् के ज्योतिर्लिंग के , फिर आते है बद्रीनाथ और अंत में जगन्नाथपुरी के तीनो देवो के |

मंदिर के दूसरी तरफ टिकट लेकर आप मानव निर्मित गुफा में नरसिंह भगवान की भगवान शिव , माता वैष्णो देवी और साधू संतो की झाखियाँ देख सकते है |

मंगलनाथ मंदिर

संभवतः यह एकमात्र उज्जैन में मंगलनाथ मंदिर है जहा मंगल के दोषों को शांत करने के लिए पूजा अर्चना की जाती है | जिन व्यक्तियों के मांगलिक दोष होते है वे यहा पूजा पाठ द्वारा उन दोषों को दूर करवाने दूर दूर से यहा आते है | यह मंदिर उज्जैन के भव्य मंदिरों में से एक  है | कहते है मंगल का जन्म उज्जैन में हुआ अत: इस मंदिर की मान्यता अत्यधिक है |


मंदिर में मंगल भगवान को शिवलिंग के समान ही पूजा जाता है | मंगलवार को यहा काफी भक्त बाबा मंगल के दर्शन के लिए आते है  | पढ़े : मंगल दोष के कारण और उपाय

हरसिध्दि

हरसिध्दि देवी मंदिर  को माँ सती का शक्तिपीठ कहा जाता है | कहते है इस जगह पर माँ सती की कोहनी गिरी थी | देवी हरसिद्धि  महाराजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी थी | माँ की प्रतिमा सिंदूरी रंग से बनी हुई है | माँ के होठ मेहरून रंग के है | यह मंदिर रूद्र सागर के किनारे महाकाल मंदिर से ४०० मीटर की दुरी पर है |

क्षिप्रा घाट

उज्जैन नगर के धार्मिक स्वरूप में क्षिप्रा नदी के घाटों का प्रमुख स्थान है। नदी के दाहिने किनारे, जहाँ नगर स्थित है, पर बने ये घाट स्थानार्थियों के लिये सीढीबध्द हैं। घाटों पर विभिन्न देवी-देवताओं के नये-पुराने मंदिर भी है। क्षिप्रा के इन घाटों का गौरव सिंहस्थ के दौरान देखते ही बनता है, जब लाखों-करोडों श्रध्दालु यहां स्नान करते हैं। माँ नर्मदा नदी के समान यह भी पवित्र नदियों में से एक है |

गोपाल मंदिर

गोपाल मंदिर उज्जैन नगर में श्री कृष्ण का मंदिर है | यह नगर के बीच में है | महारानी बायजा बाई ने 1833 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था | मंदिर के चांदी के दरवाजे इसकी सुन्दरता में बढ़ोतरी करते है |

गढकालिका देवी

गढकालिका देवी का मंदिर उज्जैन के काल भैरव मंदिर के पास ही है | यह काली माँ का अति प्राचीन मंदिर है | महान कवि कालिदास जी की यह आराध्य देवी थी | यह मंदिर महाभारत काल से पूर्व का बताया जाता है | समय समय पर राजाओ ने इसका  जीर्णोध्दार करवाया है |

भर्तृहरि गुफा

भर्तृहरि की गुफा ग्यारहवीं सदी के एक मंदिर का अवशेष है, जिसका उत्तरवर्ती दोर में जीर्णोध्दार होता रहा। इस गुफा में काल भैरव काली माता आदि की अति प्राचीन प्रतिमा है | चारो धामों का पुण्य इस गुफा में दर्शन करने से मिलता है ऐसा यहा लिखा गया है |

इस गुफा के बाहर गुरु गोरखनाथ का भव्य मंदिर बना हुआ है | यही साधू संत रहा करते है |

काल भैरव

महाकाल के दर्शन करने के बाद उनके कोतवाल काल भैरव के दर्शन करना अनिवार्य है | भैरव जी जैसे काशी के कोतवाल है वैसे ही उज्जैन में है | यहा भक्तो द्वारा चढ़ाई मदिरा का भोग काल भैरव को लगाया जाता है | यह प्राचीन मंदिर राजा भद्रसेन द्वारा बनाया गया है |

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