क्यों भगवान शिव को पशुपति नाथ कहते है ?

कैसे पड़ा भगवान शंकर का पशुपति नाथ ?

Shiv Kaise Bane Pashupati Nath in Hindi

भारत के अन्दर और बाहर दो ऐसे मुख्य मंदिर है जो शिव के पशुपति नाथ के नाम पर प्रसिद्ध है | इसमे से एक नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर और दूसरा मध्य प्रदेश में मंदसौर के पशुपतिनाथ शिवलिंग | क्यों रखा गया शिव का नाम पशुपति , उसी ज्ञान को जानने के लिए यह पोस्ट आपके समक्ष लिखी जा रही है |


पाशुपत शिव है और इस शब्द का अर्थ है की सभी जीव जन्तुओ की मिलीजुली अभिव्यक्ति | अर्थात शिव शंकर प्रतिनिदित्व करते है सभी जीवो जन्तुओ , पेड़ पौधो , सकारात्मक , नकारात्मक सभी ऊर्जाओ का |

shiv pashupatinath

पढ़े : शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई


ये एकमात्र ऐसे देव है जिनकी पूजा देव भी करते है तो दानव भी | शिवजी की बारात में नाचते कूदते भूत प्रेत देवता सब समान बाराती चल रहे थे | यही कारण है की शिव को पशुपतिनाथ नाम से जाना जाता है |

ब्रह्मा से लेकर जीव तरण तक सभी पशु है जो संसार के वशीभूत है तथा उनका पति होने से रूद्र को पशुपति कहा जाता है | शिव ही २६ तत्वों से जीवो को माया के पाश से बांध कर रखते है | ये पाश है

१० इन्द्रियाँ , चार (मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार ) , अंत:करण , ५ तत्व (जल , आकाश , वायु, अग्नि , पृथ्वी  ) , पञ्च तन्मात्रा (शब्द , स्पर्श , रूप ,रस , गंध )

कैसे दूर कर स्वयं को सांसारिक पाशो से

जो भी जीव अच्छे कर्म और प्रभु भक्ति मन से करते है वे शीघ ही इन पाशो से मुक्त हो जाते है | भक्ति पापो से मुक्ति का सबसे अच्छा साधन है | इसमे तीन प्रकार के भजन है |

प्रभु के रूप का चिंतन करना मानस भजन है |

मंत्र जप करना वाचिक भजन है और प्राणायाम करना कायिक भजन है |

धर्म और अधर्म की पाशो से मनुष्य बंधा है जो प्रभु की कृपा से ही दूर हो सकते है |

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