कितने मुखी रुद्राक्ष के लिए कौनसा मंत्र , आइये जाने

रुद्राक्ष का अर्थ है रूद्र का अक्ष अर्थात भगवान शिव के नेत्र के आंसू | एक बार महा तप के बाद जब शिवजी ने अपनी आँखे खोली तो उनके नेत्र से आंसू निकल गये और वे जिस स्थान पर गिरे वहा रुद्राक्ष फल के वृक्ष उत्पन्न हो गये | ये रुद्राक्ष अपने मुख से चौदह प्रकार के मिले | सभी का अपना अपना महत्व और मंत्र और फल है | आइये जाने विस्तार से की किस रुद्राक्ष के मुख के आधार पर कौनसा मंत्र जुड़ा हुआ है |


पढ़े : रुद्राक्ष की उत्पत्ति की कहानी

rudraksh ke liye mantra

रुद्राक्ष और उससे जुड़े हुए मंत्र

एक मुखी रुद्राक्ष– लक्ष्मी प्राप्ति,भोग एवं मोक्ष के लिए ‘ॐ ह्रीं नम:’

दो मुखी रुद्राक्ष– कामनाओं की पूर्तिके लिए धारण मंत्र-‘ॐ नम:’


तीन मुखी रुद्राक्ष -विद्या प्राप्ति के लिए धारण मंत्र-‘ॐ क्लीं नम:’

चार मुखी रुद्राक्ष -धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्राप्ति के लिए धारण मंत्र-‘ॐ ह्रीं नम:’

पांच मुखी रुद्राक्ष -मुक्ति एवं मनोवांछित फल हेतु धारण मंत्र-ॐ ह्रीं क्लीं नम:

छ: मुखी रुद्राक्ष-पाप से मुक्ति हेतु मंत्र-ॐ ह्रीं ह्रुं नम:

सात मुखी रुद्राक्ष – सांसारिक सुख भोग  के लिए मंत्र ॐ हुं नम:

आठ मुखी रुद्राक्ष-लंबी आयु और अकाल मृत्यु से बचाव  के लिए ॐ हुं नम:
नौ मुखी रुद्राक्ष  कमाना और इच्छा पूर्ति के लिए  ॐ ह्रीं ह्रुं नम:
दसमुखी रुद्राक्ष संतान सुख प्राप्ति हेतु मंत्र-ॐ ह्रीं नम: के साथ पहनें।
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष सर्वत्र विजय प्राप्त करने हेतु इस धारण मंत्र-ॐ ह्रीं ह्रुं नम:
बारह मुखी रुद्राक्ष रोगों में लाभ हेतु मंत्र-ॐ क्रौं क्षौं रौं नम:
तेरह मुखी रुद्राक्ष सौभाग्य एवं मंगल की प्राप्ति के लिए मंत्र-ॐ ह्रीं नम:

चौदह मुखी रुद्राक्ष  समस्त पापों का नाश करता है। धारण मंत्र-ॐ नम: इसके अलावा एक गौरीशंकर रुद्राक्ष भी होता है। यह समस्त प्रकार के सुख प्रदान करने वाला होता है। इसे बिना किसी मंत्र के मात्र शुद्धि कर धारण कर सकते हैं।

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