पुरुषोत्तम मास | मलमास की पौराणिक कथा

पुरुषोत्तम मास में पूजा पाठ का महत्व और जुड़ी पौराणिक कहानी

पुरुषोत्तम मास जिसे हम मलमास के नाम से भी जानते है , हर तीसरे साल आता है | पर क्या आप जानते है की पुरुषोत्तम मास के महत्व को बताने वाली पौराणिक कहानी क्या है | यदि आपको नही पता तो इस पोस्ट के माध्यम से आप जानेंगे की क्यों पुरुषोत्तम मास में पूजा आराधना का अत्यंत महत्त्व है |


purshotam mas ki mahima

स्वामीविहीन मलमास ने विष्णु को सुनाया दुखड़ा

अधिकमास (मलमास) या पुरुषोत्तम मास से जुड़ी एक रोचक कथा इस तरह है की एक बार स्वामीविहीन होने के कारण यह मास भगवान विष्णु के पास गया और अपने दुःख की व्यथा सुनाने लगा | उसने बताया मुझे (अधिकमास ) को लोग मलमास के नाम से पुकारते है जो उसे शर्मिंदा करता है अत: मेरी इस समस्या का कोई हल निकले प्रभु |


तब लक्ष्मी नारायण विष्णु उन्हें गोलोक में श्री कृष्ण के पास ले जाते है | भगवान कृष्ण मलमास की व्यथा को दूर करने के लिए उन्हें  पुरुषोत्तम नाम देते है | साथ ही यह वरदान देते है की आज के बाद मैं उसका स्वामी रहूँगा और मेरे सभी गुण इस मास में समाविष्ट  हो जायेंगे |

पुरुषोत्तम मास की पूजा का फल

उन्होंने बताया की जो भक्त इस पुरुषोत्तम मास में मन और आत्मा से भक्ति और धर्म कर्म के कार्य करेगा , उसे कई गुणा फल की प्राप्ति होगी | इस मास में तीर्थ स्थलों में स्नान , पूजन , यज्ञ हवन , अनुष्ठान और दान का अत्यंत महत्व रहेगा |

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