क्यों पहनते हैं जनेऊ और जाने महत्व और होने वाले लाभ

क्यों पहनते हैं जनेऊ और मिलने वाले लाभ

हिंदू धर्म में सोलह संस्कार होते है जिनमें से एक यज्ञोपवीत संस्कार भी है. इसका दूसरा नाम जनेऊ संस्कार हैं. जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं. इसे पुरुष द्वारा धारण करने की परम्परा प्राचीन है. वेदों और धार्मिक पुराणों में यज्ञोपवीत के महत्व और महिमा के बारे में बताया गया है .janeu ke laabh

यह उपनयन संस्कार के अंतर्गत ही जनेऊ पहनी जाती है जिसे ‘यज्ञोपवीत संस्कार’ भी कहा जाता है. मुंडन और पवित्र जल में स्नान भी इस संस्कार के अंग होते हैं. यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को सभी मुख्य नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है साथ ही इसके पवित्र धागे को अपवित्र होने से बचाव करना जरुरी है .


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ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं तीन सूत्र

जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है. ब्राह्मणों के यज्ञोपवीत में ब्रह्मग्रंथि होती है. तीन सूत्रों वाले इस यज्ञोपवीत को गुरु दीक्षा के बाद हमेशा धारण किया जाता है. इन तीन सूत्रों में  त्रिदेव  ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं. अपवित्र और दाह संस्कार में शामिल होने के बाद  यज्ञोपवीत को बदला जाता है  . यह दो रूपों में आती है | जिस पुरुष का विवाह नही हुआ हो वो तीन धागों वाली  जनेऊ और विवाहित पुरुष छ सूत्रों वाली यज्ञोपवीत  पहनते है |

कौन कौन पहन सकता है

जनेउ सिर्फ पुरुष पहन सकते है वो भी हवन और गुरु की दीक्षा के बाद | ध्यान रखे पहनने वाले को इसके नियमो का पालन करना चाहिए | ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इससे पहनते आये है | मूत्र त्याग के समय इसे तीन बार कान पर चढ़ाया जाता है और फिर हाथ दो कर फिर से पूर्व अवस्था में लाया जाता है |


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जनेऊ पहनने से होने वाले लाभ

जनेऊ धारण करना स्वास्थ्य के लिए धर्म के लिए फायदेमंद है |

जीव कीटाणु से रक्षा : जनेऊ धारण करने वाले मल मूत्र त्याग करते समय अपना मुख बंद रखते है क्यों की यह जनेऊ धारण करने का एक नियम है | इसी कारण उनका बचाव जीव कीटाणु से होता है |

पेट चंगा : शौच क्रिया में जनेऊ धारणकर्ता को इसके धागे को कान के ऊपर लपेटा जाता है | इससे कान पर दवाब पड़ता है और उस दवाब से यहा की नसे पेट पर अच्छा प्रभाव डालती है | इससे पेट में कब्ज और अपच नही रहता | पेट के स्वस्थ होने के कारण स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है |

आध्यात्म‍िक ऊर्जा की प्राप्त‍ि : यज्ञोपवीत धारण करने वाले को आध्यात्म‍िक ऊर्जा की प्राप्ति होती है |

बुरे कामों से बचाव : जो जनेऊ को पहनते है वो किसी गलत कार्य को करने से पहले जनेऊ का ध्यान करके कई बार सोचते है | इससे उन्हें एक बल मिलता है जो उन्हें बुरे कार्य को करने से दूर रखता है |

स्मरण शक्ति‍ का बढ़ना : ऐसी भी मान्यता है की जनेऊ को पहनने वालो की स्मरण शक्ति दुसरो के मुकाबले तेज होती है | इसे कान पर बांधने से यादाश्त बढती है |

हृदय रोग व ब्लडप्रेशर से बचाव : एक अध्ययन में यह माना गया है की जो यज्ञोपवीत धारण करते है उनका ह्रदय रोग और बीपी सही रहता है |

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