भगवान विष्णु के सभी अवतार

भगवान विष्णु और भगवान शिव ने धरती पर कई बार अवतार लिया है हमारे धर्म ग्रंथो के अनुसार  जब जब पृथ्वी पर संकट आता है , तो भगवान किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर आते हैं और उन सभी संकटों से मुक्ति दिलाते है | इसी प्रकार भगवान विष्णु ने भी कई अवतार लिए है | कलियुग के अंत में भी उनका एक और कल्कि अवतार अवतरित होने वाला है | भगवान विष्णु 23 अवतार पहले ही ले चुके है |

भगवान विष्णु के अवतार

विष्णु के लिए गये सभी अवतार

1- श्री सनकादि मुनि (Shri Sankadi Muni) :
धर्म ग्रंथों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में लोक पितामह ब्रह्मा जी  ने अनेक लोकों की रचना करने की इच्छा से घोर तपस्या की। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने तप अर्थ वाले सन नाम से युक्त होकर सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार नाम के चार मुनियों के रूप में अवतार लिया। ये चारों प्राकट्य काल से ही मोक्ष मार्ग परायण, ध्यान में तल्लीन रहने वाले, नित्यसिद्ध एवं नित्य विरक्त थे। ये भगवान विष्णु के सर्वप्रथम अवतार माने जाते हैं।

2- वराह अवतार (Varaha Avtar) : भगवान विष्णु का द्वितीय अवतार वराह अवतार था !जो भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया को अवतरित हुए थे ! इस अवतार में आने का प्रमुख कारण था हिरण्क्षय के कहर से सृष्टि को बचाना

3- नारद अवतार (Narad Avtar) : हमारे धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि देवर्षि नारद भगवान विष्णु के ही अवतार है ! जो कि धर्म के प्रचार और प्रसार एवं लोक कल्याण के लिए हमेशा प्रगतिशील रहते हैं ! देवर्षि नारद को शास्त्रों के अनुसार भगवान का मन भी कहा गया है ! ये ब्रह्मा जी के पुत्र थे और उन्होंने अपनी कठिन तपस्या से देवर्षि पद प्राप्त किया था !
4- नर-नारायण (Nar-Narayan Avtar) :   भगवान  विष्णु का चतुर्थ अवतार नर नारायण अवतार है ! इस अवतार में इनका रूप ऋषि मुनियों की समान है ! कहा जाए तो भगवान विष्णु ने जो लोको की रचना के लिए जो अवतार लिए थे यह उसी की प्रकार या उसी की भली भांति था ! उनके हाथों में अर्थात इस अवतार में उनके हाथों में हंश, चरणों में चक्र एवं वक्ष स्थल में श्री वत्स के चिन्ह थे !

5- कपिल मुनि ( Kapil Avtar) :   कपिल मुनि भगवान विष्णु के पांचवें अवतार हैं ! कपिल मुनि भागवत धर्म के बारह  आचार्यों में से एक थे ! यह भगवान विष्णु का पांचवा अवतार था ! कपिल मुनि के पिता का नाम महर्षि कदम एवं माता देवदूति थी ! यह वही कपिल मुनि है जिनकी वजह से राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को उनके गुस्से का सामना करना पड़ा था और वह सभी भषम हो गए थे !
6- दत्तात्रेय अवतार (Dattatraya Avtar) : यहाँ पढ़े  विष्णु का दत्तात्रेय अवतार


7- यज्ञ ( Yagya Avatar) : भगवान विष्णु के सातवें अवतार का नाम यज्ञ है ! यज्ञ का जन्म स्वयंभुव मन्वंतर में हुआ था ! स्वायंभुव मनु की पत्नी शतरूपा के गर्भ से आकृति का जन्म हुआ !  वह प्रजापति की पत्नी थी यही भगवान विष्णु का यज्ञरूप में अवतार अर्थार्थ यज्ञ अवतरण में जन्म हुआ था !
8- भगवान ऋषभदेव (Rishabh Avtar) : हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार कहा जाता है कि महाराज नाभि की कोई संतान नहीं थी ! अतः महाराज ने अपनी धर्म पत्नी मेरूदेवी के साथ पुत्र कामना के लिए यज्ञ किया ! इस यज्ञ से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनको वरदान दिया कि मैं तुम्हारे यहां पुत्र रूप में जन्म लूंगा ! वरदान के कुछ समय बाद भगवान विष्णु महाराज नाभि के यहां पुत्र रूप में अवतरित हुए ! महाराज नाभि का पुत्र अत्यंत सुंदर सुगठित शरीर वाला, कीर्तिवान, ऐश्वर्य, यश पराक्रम आदि गुणों से युक्त था इसलिए महाराज नाभि ने अपने पुत्र का नाम ऋषभ रखा !
9- आदिराज पृथु (Prithu Avtar) :
भगवान विष्णु के 9वें  अवतार का नाम आदिराज प्रथु है ! धर्म ग्रंथों के अनुसार स्वायंभूव मनु के वंश में अंग नामक प्रजापति का विवाह मृत्यु की मानसिक पुत्री सुनीथा के साथ हुआ ! उसके यहां आओ वेन  नामक पुत्र हुआ उसने भगवान को मानने से इनकार कर दिया और सबको अपनी  पूजा करने के लिए सब को कहने लगा !  तब महर्षियो ने मंत्र पूत कुशो से उसका वध कर दिया है!  तब महर्षियों ने पुत्र हीन राजा वेन की भुजाओं का मंथन किया ! जिससे प्रथु नाम पुत्र उत्पन्न हुआ ! पृथु के दाहिने हाथ में चक्र और चरणों में कमल का चिन्ह देखकर ऋषि ने बताया कि पृथु के वेश में स्वयं श्री हरि का  अंश अवतरित हुआ है !
10- मत्स्य अवतार (Matsya Avtar) : मत्स्य अवतार इस धरती को बचाने के लिए महा विशाल मछली के रूप में लिया गया |मत्स्य अवतार विष्णु


11- कूर्म अवतार (Kurm Avtar) : कछुए  का अवतार लेकर समुद्र मंथन में सहायता की थी।

12- भगवान धन्वन्तरि (Dhanwantari Avatar) : समुन्द्र मंथन में यह अमृत कलश लेकर अवतरित हुए जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है |   इन्हें औषधियों का स्वामी भी माना जाता है | 

13- मोहिनी अवतार (Mohini avatar) : मोहिनी अवतार एक  अति सुन्दर और मोहक स्त्री का रूप था जो भगवान् विष्णु ने दैत्यों से अमृत कलश की रक्षा के लिए लिया था | समुन्द्र मंथन की पौराणिक कथा में मोहिनी अवतार का वर्णन आता है |

14- भगवान नृसिंह (Narsih Avatar) : राजा हिरण्यकशिपु का वध करने और अपने भक्त प्रहलाद को उससे बचाने ले लिए सिंह और नर के रूप में अवतार लिया था |  

15- वामन अवतार (Vaman Avatar) : महादानी दैत्यराज बलि   से तीनो लोको को बचाने के लिए यह अवतार विष्णु ने लिया |

16- हयग्रीव अवतार (Hayagreeva Avatar) : पढ़े घोड़े की गर्दन रूप वाला अवतार विष्णु ने लिया |

17- श्रीहरि अवतार ( Shri Hari Avtar) : धर्म ग्रंथों के अनुसार प्राचीन समय में त्रिकूट नामक पर्वत की तराई में एक शक्तिशाली गजेंद्र अपनी हथिनियों के साथ रहता था। एक बार वह अपनी हथिनियों के साथ तालाब में स्नान करने गया। एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया | इन दोनों का युद्ध सैकड़ो साल चला | अंत में गजेंद्र ने विष्णु का ध्यान किया और विष्णु ने श्रीहरि अवतार लेकर मगरमच्छ को मार दिया |

18- परशुराम अवतार (Parshuram Avatar) : परशु जिनके हाथ की शोभा को बढाता है और जो शिव की महा तपस्या से उन्हें प्राप्त हुआ और जिनका जन्म ब्राहमण कुल में हुआ , ऐसे महाज्ञानी महाशक्तिशाली परशुराम अवतार की महिमा को जाने

19- महर्षि वेदव्यास ( Vyas Avatar) : रामायण के रचियता महर्षि वेदव्यास जी को भी भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है |

20- हंस अवतार (Hans Avatar) : सनकादि मुनियों का संदेह दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने यह अवतार लिया | 

21- श्रीराम अवतार (Ram avatar) : भगवान श्रीराम 21 वे अवतार थे  ! उस समय रावण का बहुत आतंक था ! उससे सभी देवता डरते थे ! उसके वध के लिए ही भगवान विष्णु ने  राजा दशरथ के यहां माता कोशल्या की गर्भ से पुत्र रूप में जन्म लिया ! इस अवतार में भगवान विष्णु ने अनेक राक्षसों का वध किया और मर्यादा का पालन करते हुए अपना जीवन यापन किया है ! पिता के कहने पर वनवास गए थे ! वनवास वक्त समय राक्षस राज रावण उनकी पत्नी सीता हरण करके ले गया था ! सीता की खोज में भगवान लंका पहुंचे वहां भगवान श्री राम और रावण का घोर युद्ध हुआ जिस में रावण मारा गया ! इस प्रकार भगवान विष्णु ने राम अवतार लेकर देवताओ को भयमुक्त किया ! इसलिए हम कह सकते हैं कि त्रेता युग में भगवान ईश्वर ने राम के रूप में अवतार लिया था !

22- श्रीकृष्ण अवतार (Krishna Avatar) : भगवान विष्णु ने यह अवतार द्वापर युग में लिया था ! उनका यह अवतार लेने का मुख्य कारण कंस का वध करना था और उनके इस अवतार का नाम भगवान कृषण था ! महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन के साथी बने और दुनिया को गीता का ज्ञान दिया ! धर्मराज युधिष्ठिर को राजा बना कर धर्म की स्थापना की !

23- बुद्ध अवतार (Buddha Avatar) : भगवान विष्णु का 23 वा अवतार बुद्ध अवतार है तथा हम कह सकते हैं गौतम बुद्ध को भी भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है ! परंतु पुराणों में वर्णित भगवान बुध देव का जन्म गया के समीप कीकट में हुआ था ! और उनके पिता का नाम अजन बताया जाता है !यह प्रसंग पुराण वर्णित बुद्धावतार का ही
है ! बुद्धत्व के पास  और उन्होने उपदेश दिया कि क्या क्या करना पाप है यज्ञ से जीव हिंसा होती है यज्ञ की अग्नि से कितने ही पुरानी जीव भस्म हो जाते हैं ! भगवान बुद्ध के उपदेश से दैत्य प्रभावित हुए ! उन्होंने यज्ञ वैदिक करना छोड़ दिया ! इसके कारण की शक्ति कम हो गई और देवताओं ने उन परहमला कर अपना राज्य पुन प्राप्त कर लिया !

24- कल्कि अवतार (Kalki Avatar) :  यह अवतार भविष्य में कलियुग के अंत में होगा इसके बारे में पढ़े कलियुग के अंत में लेंगे भगवान विष्णु का कल्कि अवतार का मंदिर जयपुर राजस्थान में पहले ही बनाया जा चूका है |

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