होलाष्टक क्या है

होलाष्टक पर वर्जित शुभ कार्य

Holashtk 2019 and Importance होलाष्टक के समय शुभ कार्य वर्जित होते है | यह फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को लगता है | होलाष्टक फिर आठ दिनों तक रहता है और सभी शुभ मांगलिक कार्य रोक दिए जाते है | यह दुलहंडी पर रंग खेलकर खत्म होता है |

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2019 में होलाष्टक कब से है :

इस साल 2019 में होलाष्टक फाल्गुन अष्टमी अर्थात 14 मार्च से लग रहा है जो होली तक रहेगा | मान्यता है कि इस आठ दिन के समय में सभी नव ग्रह रूद्र हो जाते है अत: कोई मांगलिक कार्य नही करने चाहिए | इस आठ दिन के समय में कोई मांगलिक कार्य , गृह प्रवेश करना वर्जित होगा | व्यक्ति को नए रोजगार और नया व्यवसाय भी नही शुरू करना चाहिए |

holasthak ashubh

होलाष्टक पर होते है 2 लकड़ी की स्थापना

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी पर 2 डंडे स्थापित किए जाते हैं। जिनमें एक को होलिका तथा दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है। इससे पूर्व इस स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है | फिर हर दिन इसमे गोबर के उपल , लकड़ी घास और जलने में सहायक चीजे डालकर इसे बड़ा किया जाता है |

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कामदेव हुए थे इस दिन भस्म

kamdev bhashmशास्त्रों में बताया गया है की होलाष्टक के दिन ही कामदेव ने शिव तपस्या को भंग किया था | इस कारण शिव जी अत्यंत क्रोधित हो गये थे | उन्होंने अपने तीसरे नेत्र की अग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया था | हालाकि कामदेव ने देवताओ की इच्छा और उनके अच्छे के लिए शिव को तपस्या से उठाया था |

कामदेव के भस्म होने से समस्त संसार शोक में डूब गया | उनकी पत्नी रति ने शिव से विनती की वे उन्हें फिर से पुनर्जीवित कर दे | तब भगवान भोलेनाथ से द्वापर में उन्हें फिर से जीवन देने की बात कही |

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