गरुड़ पुराण के अनुसार रेप करने वाले को ऐसी सजा दी जाये तो रेप करने वाली की रूह कांप जाएगी |

भारत में बलात्कार की घटनाये लगातार बढ़ रही है | रेप करने वालो ने नवजात बच्चियों के साथ साथ वृद्ध बूढी माओ तक को नही छोड़ा | अपने हवास की आग में वे अंधे और दानव तुल्य होकर अक्षम्य कुक्रर्म कर बैठते है | अपने आनंद की पराकाष्टा को ओर बढ़ाने के लिए वे अंत में उस पीडिता को जिन्दा जला देते है या मार देते है जिससे कि वो उसके साथ हुए अत्याचार के बारे में किसी को बता नही सके |

गरुड़ पुराण से जाने लो बलात्कार की सजा

ऐसी कुकर्मो से मानवता शर्मसार है , ऐसे दरिंदो का ना होई धर्म , ना ही कोई मानवीय मूल्य है | कानून का पुलिस का इन्हे कोई भय नही है | शास्त्रों में पर ऐसी जघन्य अपराध के लिए बहुत से दण्ड बताये गये है , यदि कानून धर्म के इन नियमो पर पालन किया जाये तो बलात्कार करने से पहले व्यक्ति को हजारो बार सोचना पड़ेगा | यह दण्ड दुसरे व्यक्तियों के लिए भी सबक होगा |

आइये जानते है हिन्दू धर्म के 18 पुराणों में से एक गरुड़ पुराण के अनुसार एक रेप (बलात्कार ) करने वाले के लिए कौनसी सजाये या यातनाये बताई गयी है | यह सजा इतनी कठोर है कि अपराधी लाखो बात अपने किये पर पछतायेगा |

गरुड़ पुराण के अनुसार बलात्कारी को दी जाने वाली सजा

गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्यों को उसके कर्म के अनुसार सजा भुगतनी पड़ती है | बलात्कारी को मृत्यु के बाद दक्षिण मार्ग से नरक में लाया जाता है जो सबसे कठोर यातना वाला मार्ग है | बलात्कारी को एक नदी से गुजरना पड़ता है जिसका नाम वैतरणी है जो रक्तमय है  जिसमे  भयानक कीड़े , घड़ियाल से भरी हुई है | यह नदी अत्यंत गर्जना करने वाली रक्त की प्यासी नजर आती है |

garudh puran rapist

इस नदी को पार करने में बलात्कारी को बहुत पीड़ा होती है | उसके शरीर का रोम रोम इन कीड़ो द्वारा खाया जाता है |

इसके बाद बलात्कारी को तामिस्त्र नामक नर्क में भेजा जाता है | जहा बलात्कारी को  लोहे के एक बहुत गर्म तवे पर कई वर्षो तक रखा जाता है |

इसके बाद यह सजा समाप्त होने के बाद उसे  तप्तसूर्मी नामक नर्क भेजा जाता है | यहा उसे गर्म लोहे की महिला मूर्ति के साथ चिपकाकर बांध दिया जाता है | यदि अपराधी महिला है तो उसके लिए  गर्म लोहे की पुरुष मूर्ति काम में ली जाती है |

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गरुड़ पुराण के अनुसार कई सालो तक बलात्कारी ऐसे कठोर सजा को भुगतता है |

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