भगवान और उनके अर्पण करने वाले पुष्प

पुष्प अर्पण भगवान् को

पुष्प ईश्वर को पूजा में चढ़ाये जाते है | पुष्प सुगंध और सुन्दरता  का प्रतीक है | हर देवी देवताओ को अलग अलग उनके अनुसार पुष्प अर्पण किये जाते है |

किस देवी देवता को कौनसा पुष्प चढ़ाये

माँ काली – इनको अड़हुल का पुष्प अति प्रिय है। कहते है 108 लाल अड़हुल के फूल अर्पित करने से माँ प्रसन्न होकर भक्तो की मुरादे पुरी करती है |

भगवान श्रीगणेश- इन्हे कोई भी पुष्प अर्पित कर सकते है | इनसे सबसे प्रिय तीन या पञ्च पत्ती वाली दूर्वा है | इन्हे कभी भी तुलसी के पत्ते ना चढ़ाये |

भगवान शिव- भगवान शंकर को धतूरे के फूल, हरसिंगार, व नागकेसर के सफेद पुष्प, सूखे कमल गट्टे, कनेर, कुसुम, आक, कुश आदि के फूल चढ़ाने का विधान है। इन्हे कभी भी केवड़े के पुष्प ना चढ़ाये ।

माँ दुर्गा- इनको लाल गुलाब के पुष्प से पूजा कारण सर्वश्रेष्ठ है।

हनुमान जी- इनको लाल पुष्प जैसे लाल गुलाब , गेंदा बहुत प्रिय है। चमेली का तेल भी इन्हे जल्द प्रसन्न करता है |

शनि देव- इन्हे गहरे रंग के पुष्प चढाने चाहिए | नीले लाजवंती के पुष्प इन्हे प्रिय है |

भगवान विष्णु- इन्हें कमल, मौलसिरी, जूही, कदम्ब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वासंती, चंपा, वैजयंती के पुष्प विशेष प्रिय हैं। विष्णु भगवान तुलसी पत्तो से अति शीघ्र प्रसन्न होते है ।

माँ सरस्वती-  विद्यादायिनी माँ सरस्वती को श्वेत पर पीले पुष्प अति प्रिय है | इन्हे सफेद गुलाब, सफेद कनेर या पीले


भगवान श्रीकृष्ण- चणक, मालती, कुमुद, करवरी, पलाश व वनमाला के फूल कृष्णा को प्रसन्न करते है ।

भगवती गौरी पार्वती –  शिवप्रिया को बेला, सफेद कमल, पलाश, चंपा के फूल के अलावा शिवजी को प्रसन्न करने वाले पुष्प अति प्रिय है ।

विष्णुप्रिया लक्ष्मीजी – मां लक्ष्मी को पीला पुष्प , श्वेत कमल और लाल गुलाब बहूत प्रसन्न करते है |

अर्पण करने वाले पुष्पों से जुडी मुख्य बाते :

 

भगवान की पूजा कभी भी सूखे  बासी  और मुरझाये हुए फूलों से न करें।

कहते है की कमल का पुष्प  10 से 15 दिन तक बासी नहीं माना जाता है अत इसे इस काल अवधि से पूर्व पूजन में काम ले सकते है |

सिर्फ पुष्पों में चंपा की कली ही देवी देवताओ को अर्पित कर सकते है , इसके अलावा को कोई कली अर्पण ना करे |

पुष्पों को दोनों हाथो से विन्रम रूप से उन्हें अर्पण करे | पुष्प शुद्ध और आप भी शुद्ध रूप में रहे |

तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है।

शास्त्रों के अनुसार शिवजी को प्रिय बिल्व पत्र छह माह तक बासी नहीं माने जाते हैं। अत: इन्हें जल छिड़क कर पुन: शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।


यह भी पढ़े

देवी देवताओ के वाहन क्या क्या है

तीर्थ में रखे यह बाते ध्यान

घर में लगी तुलसी बताती है आने वाले संकट के बारे में

घर में करे यह उपाय रहे सुख समृद्धि

पर्स से बने मालामाल

गरीबी के मुख्य कारण

क्यों नही करे गणेशजी की पीठ के दर्शन

आपकी राशि और उससे जुडा मंत्र जाने

 

3 comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.