संत रविदास रैदास जी का जीवन परिचय

संत रविदास रैदास जी का जीवन परिचय

काशी ( वाराणसी ) में 14वी शताब्दी के कुछ साल साल पहले जन्मे थे रैदास जी | मध्ययुगीन साधकों और कवियों में इनका विशिष्ट स्थान है | यह निर्गुण संप्रदाय के संत थे | इनकी नजर में जातिगत भेदभाव मानवता के लिए सबसे ज्यादा घातक है | उनका पूर्ण मत था की की ईश्वर को पाने के लिए किसी तीर्थ यात्रा की नही बल्कि आत्मा और मन से सच्ची पूजा की जरुरत है | वे उस समय मीरा बाई , कबीर दास के संपर्क में रहे |

पढ़े : भारत के महान 9 गुरु और उनकी महिमा


संत रैदास जी की जीवनी

आजीविका के लिए काम 

रैदास जी चमार जाति के थी जिसे निम्न स्तर की जाति समझा जाता है | अपने पिता की तरह उन्होंने पारिवारिक कार्य चमड़े से जूते चप्पल बनाने का शुरू किया | वे अपने काम को पूर्णता और रूचि रखकर करते है | कभी भी इस काम को लेकर उन्हें गलानि नही हुई |

धर्म से रिश्ता

भारत में उस समय छुआ छुत जैसी बुराइयों ने अपनी जड़े जमा रखी थी | छोटी जाति वालो को मंदिरों में प्रवेश नही करने दिया जाता था | पर रैदास जी के लिए भगवान सभी के लिए समान है अत: वे ईश्वर की भक्ति मन लगाकर करते थे | वे अपने कलम की चमत्कारी शक्ति से बड़े ही ज्ञानवर्धक कविताये लिखते थे | उनकी नजर में ईश्वर हर जगह है और हर रूप में है |


मीरा बाई के गुरु

मीरा बाई पर संत रविदास (रैदास) जी बहुत प्रभाव था | वे आध्यात्मिक ज्ञान और काव्य रचना के लिए उनसे ज्ञान अर्जित किया करती थी | राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मीरा के मंदिर के पास ही एक छोटी सी छत्री है जिसमे रविदास के पदचिन्ह मिलते है |

मन चंगा तो कठौती में गंगा

रैदास जी के अनुसार तीर्थ स्थान पर जाने की धर्म में जरुरत नही होती है | यदि आप मन से पूर्ण धार्मिक और अच्छे कर्मो वाले  है तो आपको देवता हर जगह नजर आ जायेंगे | उन्होंने यह प्रमाणित भी किया | एक बार उन्होंने किसी को यह प्रमाण देने के लिए अपनी जूते बनाने में सहायक कटोरी में ही गंगा के दर्शन करवा दिए थे | तभी यह लोकोक्ति प्रसिद्ध हुई :- मन चंगा तो कठौती में गंगा |

समाज को शिक्षा

इन्होने छोटी जाति में जन्म लिया पर इनके विचार उत्तम कोटि और ईश्वर के दूत जैसे थे | अपने विचारो से उन्होंने सिद्ध किया की यह जातिवाद सिर्फ इंसानों की मानसिकता की देन है | ईश्वर कभी भी जाति देखकर अपनी कृपा नही बरसाते | ईश्वर के लिए जिस भी मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति है , वे उसी के साथ है | ईश्वर को पाने के लिए ढोंग की जरुरत नही है |

 

Other Similar Posts

गोस्वामी तुलसीदास जी कहानी और जीवन परिचय से जुड़ी बाते

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और मुख्य रोचक बाते

रामकृष्ण परमहंस की जीवनी और उनसे जुडी रोचक बाते

मीरा बाई की जीवनी और कृष्ण प्रेम

संत नीम करौली बाबा जिन्होंने फेसबुक एप्पल जैसी कंपनी के मालिको को दी ज्ञान भरी शिक्षा

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.