पूजा पाठ में हाथो से बनाई मुद्राओ का महत्व

मुद्रा का अर्थ है आकृति का निर्माण करना | हम यहा पूजा पाठ या धार्मिक अनुष्टान में कार्य सफलता के लिए हाथो से बनाई जाने वाली अस्थाही मुद्राओ की बात करने वाले है | हिन्दू धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा पाठ या मंत्र जप योग में यदि हाथो से विशिष्ट मुद्राये बनाकर धार्मिक कृत्य किया जाए तो वो जल्दी ही इच्छित देवता को प्रसन्न करती है |

हाथ मुद्राओ का महत्व और लाभ पूजा पाठ में

क्या क्या चाहते है और किस देवता से आप इच्छित फल की अभिलाषा रखते है , उसके आधार पर हाथो की उंगलियों से अलग अलग मुद्राये बनाने का नियम बताया गया है |

मुद्रा प्रदर्शन का महत्व :

पूजा पाठ या धार्मिक कर्मकांड में हाथो से बनाई मुद्रा से देवता प्रसन्न होते है और शिघ फल देते है | मुद्रा के अभाव में पूजा , अर्चना , योग आदि अधूरे रहते है | ,मुद्राओ से पाप का नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है | हमारी नजर में हाथो से 250 से ज्यादा मुद्राए बनाई जा सकती है |

पञ्च तत्वों के प्रतिक है पांच अंगुलियाँ

पञ्च महाभूत और उनकी अंगुलियाँ

हाथ की पांचो अंगुलियों को पञ्च तत्व का प्रतिक बताया गया है | अंगूठा आकाश तत्व का , तर्जनी वायु , मध्यमा अग्नि तत्व का , अनामिका जल तत्व और कनिष्टा पृथ्वी तत्व को इंगित करती है | इन पांच उंगलियों से विभिन्न तत्वों का समावेश होने से साधक पर उक्त देवता प्रसन्न होते है |

मुष्टि और तीर्थ :

जब सभी अंगुलियों को समेत करके हथेली को बंद कर लिए जाये तो उसे मुष्टिका या मुट्ठी कहते है | यदि कनिष्ठा को बाहर निकाल कर बाकि अंगुलियों को हथेली में समेत लिया जाये तो उसे अरतनी कहते है |

हथेली को कर तल और हथेली के पीछे के भाग को पृष्ट कहते है |

hasht mudra kya hai

हथेली में तीर्थ :

अंगूठे के निचे आत्म तीर्थ , उंगलियों के ऊपर परमार्थ तीर्थ , कनिष्ठा के निचे देव तीर्थ और तर्जनी और अंगूठे के बीच में पितृ तीर्थ स्तिथ होते है |

नोट : मुद्राओ का सही प्रयोग देवता को प्रसन्न पर गलत प्रयोग उन्हें रुष्ट भी कर सकते है | योग्य गुरु के सानिध्य में ही इसका अभ्यास करे |

कुछ मुद्राओ के नाम और उन्हें करने से फायदे

सूर्य मुद्रा : इस मुद्रा को करने से कोलेस्ट्रॉल घटता है और शरीर में शक्ति बढती है | यह मोटापे को भी दूर करता है |

वायु मुद्रा : गैस की समस्या को दूर करता है | जोड़ो में होने वाले दर्द को मिटाता है |

पृथ्वी मुद्रा : हाइपरटेंशन दूर करता है | स्फूर्ति लाकर आत्म विश्वास बढाता है |

ज्ञान मुद्रा: इस मुद्रा से अज्ञानता दूर होकर बुद्धि में वृधि होती है | यह दिमाग को तेज करता है |

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