गांधारी के श्राप के कारण श्री कृष्ण के साथ यदुवंश का अंत

इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध कुरुक्षेत्र का माना जाता है जिसमे भाई से भाई भिड़े , गुरु से शिष्य , दादा से पोते , मामा से भांजे और रिश्तो से रिश्ते | यह युद्ध श्री कृष्ण भगवान चाहते थे और वे चाहते तो इसे रोक सकते थे पर उन्होंने ऐसा नही किया | गांधारी अपने पुत्रो के मरने से अत्यंत व्याकुल थी और युद्ध के बीच में जब श्री कृष्ण उनसे मिलने आये तो वो उन पर अत्यंत कुपित हो गयी |

gandhari ka shraap

उन्होंने श्री कृष्णा से कहा कि वे इस युद्ध के होने का सबसे बड़े कारक है और इसी कारण जिस प्रकार कुरु पुत्रो का अंत हुआ है वैसे ही कृष्ण तुम्हारे साथ साथ पुरे यदुवंश का भी अंत होगा |

गांधारी शिव जी की परम भक्त थी और उनके श्राप के कारण ही 36 साल बाद श्री कृष्ण की मृत्यु के उपरान्त  यदुवंश वाले आपस में लड़ने लगे और फिर पूरी द्वारका समुन्द्र में समा गयी |

Other Similar Posts

द्रोपदी के पांच पति कैसे बने पांच पांडव

अक्षय पात्र क्या होता है और शास्त्रों में इसका विवरण

कुरुक्षेत्र तीर्थ की महिमा और शास्त्रों में वर्णन

कृष्ण ने जन्म लेते ही किये थे ये 6 चमत्कार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.