करे शिव स्तुति रूद्राष्टक स्तोत्रं श्लोक मंत्र से

शिव स्तुति में रूद्राष्टक : Shiv Stuti Rudraashtak Stotram in Hindi

भगवान शिव की महिमा हिन्दू धर्म में सबसे बड़ी बताई गयी है | किसी भी पुराण में शिव के जन्म की कथा सही नही दे पाये है | शिव वेदों और पुराणों से भी बहुत उपर है | इनके निराकार रूप शिवलिंग की उत्पति की कथा से पता चलता है की शिव की पूजा से सभी देवता प्रसन्न होते है | शास्त्रों में संस्कृत भाषा में शिव स्तुति श्लोक और मंत्र का ज्ञान आता है | भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले उपाय में शिव स्तुति की अहम भूमिका है | इसे शिवरात्रि और सोमवार की शिव पूजा में जरुर काम में ले |


shiv stuti

शिव स्तुति शिव रुद्राकष्टक द्वारा

शिव स्तुति में रूद्राष्टक

निचे दी जाने वाली शिव स्तुति को शिव रुद्राष्टक का पाठ कहा जाता है | इस शिव रुद्राष्टक के रचियता रामचरितमानस के जनक गोस्वामी तुलसीदास जी है | शिव रुद्राष्टक स्तुति में शिव के व्यापक रूप को नमन किया गया है | इनके रूप की महिमा बताकर नीलकंठ को दया का सागर बताया गया है |

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नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥१॥

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥२॥
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥३॥

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥४॥
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥५॥

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥६॥


न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥७॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥८॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥९॥

॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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