पूजा में चावल , जल और पुष्प हाथ में लेकर करना चाहिये संकल्प

पूजा पाठ में संकल्प का महत्व

Pooja Me Sankalp Ka Mahtav हिन्दू धर्म (Hinduism) में देवी देवताओ की पूजा के कई विधि विधान है | इन विधियों के पीछे ईश्वर की प्राप्ति के गुप्त मार्ग छिपे हुए है | हमें इन विधियों का अच्छे से अनुसरण करके पूजा करनी चाहिए जिससे की पूजा का फल हमें अधिक से अधिक प्राप्त हो सके | हमने हमारी पूर्व की पोस्ट में जल से आचमन करने के बारे में बताया था , यह आचमन हमारे आंतरिक मन को शुद्ध करता है | इसी तरह हम आज पूजा में संकल्प के बारे में जानेंगे |


पढ़े :- पूजा आराधना और मंत्र से जुडी पोस्ट

ऐसे करे पूजा में संकल्प

चाहे व्रत (Fast ) हो , या फिर कोई विशेष पूजा | यदि आप इन्हे कर रहे है तो फिर मजबूत इरादे (संकल्प )- Determination  के साथ करे |

कैसे करे संकल्प

पूजा या व्रत शुरू करने से पहले दांये हाथ में जल, चावल और फूल और सिक्का ले ले | अब अपने इष्टदेव और स्वयं को साक्षी मानकर मैं (अपना नाम , गौत्र , जगह का नाम ) यह पूजा इस भावना (कामना पूर्ति ) के लिए कर रहा हूँ | मैं संकल्प लेता हूँ की इसे पूर्ण जरुर करूँगा | विध्न हरण मंगल करण श्री गणेश जल तत्व के स्वामी है अत: हाथ में जल लेकर उनके साक्षी बनाया जाता है | इसके लिए निचे दिया गया संस्कृत मंत्र बोल सकते है | अब हथेली में लिए गये जल को किसी पात्र में छोड़ दे |

puja me sankalp

संकल्प नही करे तो क्या होता है

यदि किसी व्रत या पूजा पाठ से पहले आप संकल्प नही ले तो इसका फल देवताओ के राजा इंद्र को प्राप्त हो जाता है | अत: आपकी पूजा पूर्ण नही मानी जाती है | अत: आज से ही पूजा पाठ से पहले संकल्प लेना जरुर शुरू करे |


संकल्प मंत्र

यह मंत्र किसी पंडित की मदद से ही बोले | इस मंत्र में कई जगह आप और आपकी जगह से जुड़ी जानकारियाँ काम में ली जाएगी |

‘ऊँ विष्णु र्विष्णुर्विष्णु : श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वाराह कल्पै वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारत वर्षे भरत खंडे आर्यावर्तान्तर्गतैकदेशे —(अपने शहर नाम बोले )— नगरे —(अपने गाँव का नाम बोले )– ग्रामे वा बौद्धावतारे विजय नाम संवत्सरे श्री सूर्ये दक्षिणायने वर्षा ऋतौ महामाँगल्यप्रद मासोत्तमे शुभ भाद्रप्रद मासे शुक्ल पक्षे चतुर्थ्याम्‌ तिथौ भृगुवासरे हस्त नक्षत्रे शुभ योगे गर करणे तुला राशि स्थिते चन्द्रे सिंह राशि स्थिते सूर्य वृष राशि स्थिते देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु च यथा यथा राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह गुणगण विशेषण विशिष्टायाँ चतुर्थ्याम्‌ शुभ पुण्य तिथौ — +– गौत्रः –++– अमुक शर्मा, वर्मा, गुप्ता, दासो ऽहं मम आत्मनः श्रीमन्‌ महागणपति प्रीत्यर्थम्‌ यथालब्धोपचारैस्तदीयं पूजनं करिष्ये।”

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