प्रदोष व्रत कथा विधि नियम से जुडी जानकारी

प्रदोष काल का समय और महत्व

Pradosh Fast Importance and rules प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले का समय होता है  | प्रदोष व्रत रात्रि का सबसे पहला पहर, जिसे सायंकाल कहा जाता है . उस सायंकाल या तीसरे पहर के समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है | यह त्रयोदशी तिथि के दिन आता है | इस समय अर्धनारीश्वर शिव Ardnarishar Shiva शिव पूजा करने से पापो से मुक्ति मिलती है |


पढ़े : भगवान शिव को क्यों पसंद है प्रदोषप्रदोष व्रत विधि नियम

प्रदोष व्रत विधि

प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन सूर्यास्त से पहले संध्या में  स्नान कर सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद सायंकाल में विभिन्न पुष्पों, लाल चंदन, हवन और पंचामृत द्वारा भगवान शिव शंकर की पूजा करनी चाहिए। इस पूजा में सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करे | यह प्रक्रिया पुरे एक साल तक निभाए |

प्रदोष व्रत कथा

Pradosh Fast Story प्राचीन काल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था. उस पुजारी की मृत्यु के बाद, उसकी विधवा पत्नी अपने पुत्र को लेकर भरण-पोषण के लिए भीख मांगते हुए, शाम तक घर वापस आती थी. एक दिन उसकी मुलाकात विदर्भ देश के राजकुमार से हुई जो कि अपने पिता की मृत्यु के बाद दर-दर भटकने लगा था. उसकी यह हालत पुजारी की पत्नी से देखी नही गई, वह उस राजकुमार को अपने साथ अपने घर ले आई और पुत्र जैसा रखने लगी.


एक दिन पुजारी की पत्नी अपने साथ दोनों पुत्रों को शांडिल्य ऋषि के आश्रम ले गई . वहा उसने ऋषि से शिव जी के इस प्रदोष व्रत की कथा व विधी सुनी , घर जाकर अब वह प्रदोष व्रत करने लगी . दोनों बालक वन में घूम रहे थे, उसमे से पुजारी का बेटा तो घर लौट गया, परन्तु राजकुमार वन में ही रहा . उस राजकुमार ने गन्धर्व कन्याओ को क्रीडा करते हुए देख, उनसे बात करने लगा . उस कन्या का नाम अंशुमती था . उस दिन वह राजकुमार घर भी देरी से लोटा.

दुसरे दिन फिर से राजकुमार उसी जगह पंहुचा, जहा अंशुमती अपने माता-पिता से बात कर रही थी. तभी अंशुमती के माता-पिता ने उस राजकुमार को पहचान लिया तथा उससे कहा की आप तो विदर्भ नगर के राजकुमार हो ना, आपका नाम धर्मगुप्त है. अंशुमती के माता-पिता को वह राजकुमार पसंद आया और उन्होंने कहा कि शिव जी की कृपा से हम अपनी पुत्री का विवाह आपसे करना चाहते है , क्या आप इस विवाह के लिए तैयार है?

राजकुमार ने अपनी स्वीक्रति दी और उन दोनों का विवाह संपन्न हुआ. बाद में राजकुमार ने गन्धर्व की विशाल सेना के साथ विदर्भ पर हमला किया और घमासान युद्ध कर विजय प्राप्त की तथा पत्नी के साथ राज्य करने लगे. वहा उस महल में वह उस पुजारी की पत्नी और पुत्र को आदर के साथ ले जाकर रखने लगे . उनके सभी दुःख व दरिद्रता दूर हो गई और सुख से जीवन व्यतीत करने लगे.

एक दिन अंशुमती ने राजकुमार से इन सभी बातो के पीछे का रहस्य पूछा . तब राजकुमार ने अंशुमती को अपने जीवन की बात बताई और प्रदोष व्रत विधि और इसके फल के बारे में बताया | पढ़े : भगवान शिव की उत्पत्ति की कथा

वार के अनुसार प्रदोष

सोमवार को आने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोषम या चन्द्र प्रदोषम भी कहा जाता है।
मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोषम कहा जाता है।
शनिवार को आने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम कहा जाता है।

 

व्रत का उद्यापन

लगातार व्रत धारण करने के बाद फिर प्रदोष व्रत का उद्यापन किया जाता है | यह आप 11 या 26 त्रयोदशियों के व्रत रखने के बाद करे |

– प्रदोष व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि पर ही करना चाहिए |
– प्रात: जल्दी उठकर पंडितो द्वारा हवन वाली जगह को सजाये |
– ‘ऊँ उमा सहित शिवाय नम:’ मंत्र का एक माला यानी 108 बार जाप करते हुए हवन किया जाता है.
– हवन में आहूति के लिए खीर का प्रयोग किया जाता है.
– हवन समाप्त होने के बाद भगवान शिव की आरती की करे और शान्ति पाठ स्त्रोत पढ़े |
– उद्यापन के अंतिम चरण में दो ब्रह्माणों को भोजन कराये और उनके दान दक्षिणा दे |

प्रदोष उपवास में क्या खाना चाहिए

What to eat in Pradosh fast यह व्रत पुरे दिन धारण किया जाता है | सुबह नित्य कर्म से पूर्ण होकर स्नान कर ले | फिर दूध पान करे | पुरे दिन व्रत धारण करे और कुछ ना खाए | प्रदोष काल में शिव पूजन करने बाद फिर आप सागार करे | इसमे आप लाल मिर्ची ,अन्न , चावल , सादा नमक नही खाया जाता | इसमे आप फलाहार और उपवास से जुडी चीजे ही एक बार खाए |

Other Similar Posts

कैसे बना शिवलिंग , जाने उत्पत्ति की कथा

भगवान शिव के मंत्र और जप विधि  

शिव पूजा विधि सोमवार के दिन की

शिव पुराण के चमत्कारी उपाय जो दिलाते है भोले की कृपा 

सावन सोमवार व्रत से प्रसन्न होते है शिवजी

ॐ नमः शिवाय मंत्र जप विधि और नियम 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.