नाग पंचमी का महत्त्व और पूजा विधि

कब आती है नाग पंचमी और जाने इसकी महिमा

जैसा की नाम से ही पता चल रहा है यह पंचमी का दिन जब होती है नागो की पूजा |  सावन मास में शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है | इस दिन कई शिवालयो में शिवलिंग का श्रंगार नागो से किया जाता है | भक्त लोग इन सर्पो को दूध पिलाते है और सुख समृधि का आशीष मांगते है |नाग पंचमी पूजा

क्यों नागो की होती है पूजा



हमारे धर्म को ध्यान से देखे तो हम पाएंगे की नागो का सम्बन्ध भगवान शिव से भी है तो भगवान विष्णु से भी | ये शिव शंकर के आभूषण है | भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर शयन करते है | रामायण और महाभारत काल में कई बड़े बड़े राजाओ ने नाग कन्या से विवाह किया | इसी कारण इन नागो को भी पूजा के योग्य माना जाता है |

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कैसे करे इस दिन  सर्पो की पूजा

  1. इस दिन नाग देवता के दर्शन जरुर करने चाहिए |
  2. इन्हे सुगंध अति प्रिय है अत: महकने वाले पुष्प और चन्दन इनकी पूजा में काम में ले |
  3. ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा मंत्र का जाप करते हुए इन्हे दूध पिलाये |

  4. सर्पो के निवास स्थान (बाम्बी या बिल ) की भी पूजा करे |

नाग देवता की पूजा से लाभ

जो व्यक्ति नागो की पूजा पंचमी पर करते है उनपे भगवान शिव और विष्णु दोनों महादेव प्रसन्न होते है | यदि कुण्डली में राहु केतू की दशा अन्य ग्रहों के साथ मिलकर खराब है तो उन्हें इस दिन पूजा करने से अत्यंत लाभ प्राप्त होता है |

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