घर में रखे शिवलिंग की पूजा से जुड़े नियम

घर के मंदिर में एक शिवलिंग होना और उसकी पूजा करना भगवान शिव को प्रसन्न करता है | शिव भोले है तो क्रोध आने पर विकराल भी | अत: पूरी विधि विधान से शिवलिंग की पूजा करे | घर में शिवलिंग स्थापित करने के बाद कुछ पूजा के नियमो का जरुर पालन करना चाहिए जिससे महादेव आपके परिवार पर प्रसन्न रहे | शिवलिंग की महिमा अनंत और अपार है |

घर के शिवलिंग से जुडी बाते

आइये जानते है वो कौनसी 10 बाते है जो घर के मंदिर में रखे शिवलिंग से जुडी हुई है |

घर में रखे शिवलिंग से जुडी जरुरी बाते

  • शिवलिंग का आकार : घर में जो शिवलिंग हो उसका आकार छोटा होना चाहिए | यह अंगूठे से बड़ा नही हो | यदि आप पारद शिवलिंग रखते है तो यह सबसे अच्छा है | बड़ा शिवलिंग सिर्फ मंदिरों में फलदायी है |
  • एक ही शिवलिंग : घर के मंदिर में एक से ज्यादा शिवलिंग नही रखे |
  • शिवजी को अप्रिय चीजे ना चढ़ाये : भगवान शिव को कभी केतकी के पुष्प , तुलसी , सिंदूर और हल्दी ना चढ़ाये |
  • शिवलिंग को रखे शुद्ध जल में :  एक पात्र में शुद्ध जल भरे और फिर शिवलिंग को उसमे रखे | पात्र का जल कभी सूखने ना दे |
  • अभिषेक : हर दिन सुबह नहा कर शिवलिंग का दूध और जल से अभिषेक करे | और शिव जी की आरती गाये | शिव मंत्रो से भोलेनाथ को रिझाये |
  • पात्र करे रोज साफ : जिस पात्र में शिवलिंग को आपने रख रखा है , उसे रोज मिट्टी से मांझे और फिर शुद्ध जल से धोये | पात्र का पानी आप अशोक के पेड़ की जड़ में डाल दे |
  • शिवलिंग की जलधारी दिशा : यह विशेष ध्यान रखे की शिवलिंग की जलधारी की दिशा हमेशा उत्तर की तरफ होनी चाहिए |
  • धातु का शिवलिंग : यदि शिवलिंग धातु का है तो ध्यान रखे उसी धातु का नाग भी शिवलिंग पर लिपटा हुआ होना चाहिए |
  • शिवलिंग के पास मूर्ति या फोटो  : घर के मंदिर में शिवलिंग को अकेले ना रखे | उनके पास माँ पार्वती की फोटो या मूर्ति स्थापित करे | श्री गणेश भी करीब रखे तो बहुत शुभ फलदायी होगा |
  • सोमवार को विशेष पूजा : इस शिवलिंग के द्वारा सोमवार को शिव की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए |


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One comment

  • Lingashtakke slok “kumkumchandan lepit lingam pankajhar sushobhit lingam sanchit paap vinasan lingam tatpranamami sada shivalingam”ka anuvad karne par pata chalta he ki kumkum chandan chadanese sanchit paapoka Nash hota he.Is liye kumkum chada shakte he.aur sindurto matajikobhi ati priya he.Shivaji sansari hone ke karan unhe sindur chadanese wo prasan hote he.Is liye jitnebhi Shiva mandirome bina satyako Jane in kumkum sindurko chadane nahi dete un logoko lingashtak padhkar unko samajna chahiye.jyada janna ho to bahotse jyotirlingome kumkumke sringar kiye jatehe unkobhi dekhna chahiye.

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