गणेश वंदना से जल्दी सुनेंगे प्रभु आपकी करुण पुकार

अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले सभी देवी देवताओ में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता श्री गणेश की महिमा अनंत है | गणेश जी की स्तुति और वंदना से वे अपने भक्तो की करुण पुकार को सुनकर उनके दुखो को दूर करते है | माना जाता है कि पूजा की शुरुआत यदि गणेश वंदना के साथ की जाये तो वो पूजा पूर्णत संपन्न होती है |

गणेश की वंदना करने से पहले , इन्हे स्नान कराये और गणेश जी को प्रिय मोदक का भोग लगाये | गजानन को दूर्वा भी जरुर चढ़ाये | उसके बाद निम्न में से कोई भी वंदना का पाठ करे |

गणेश वंदना पाठ

गणेश वंदना : 1

विघ्न  को  हरने  वाले , पूरण  सब  करने वाले

हम प्रथम मनावें आपको , हे मूषक वाहन वाले

विघ्न को हरने वाले , पूरण सब करने वाले

हे रिद्धि सिद्धि के दाता , हे सबके भाग्य विधाता

जो दर पे तेरे आता मनचाहा फल वो पाता

हे सब सुख देने वाले दुःखों को हरने वाले

हम प्रथम मनावें आपको ,  हे मूषक वाहन वाले

हे गौरी सुता के गणेश लाडले ,शंकर गोदी बिठाए

माता – पिता की करके प्रदक्षिणा ,प्रथम पूज्य कहलाएं

हे लम्बोदर ,गणनायक ,गणेशा हे एक दंत वाले

हम प्रथम मनावें आपको ,हे मूषक वाहन वाले

हो गयी सब कीर्तन की तैयारी अब बस तुमको आना है

आस पूरी अब कर आओ ,हे भक्तों के रखवाले

हम प्रथम मनावें आपको , हे मूषक वाहन वाले |

गणेश वंदना : 2

गणपति को प्रथम मनाना है , उत्सव को सफल बनाना है ,

शिव पार्वती के प्यारे को , भगतों के बीच बुलाना है।

गणपति को प्रथम मनाने की , देवो ने रीत चलाई है ,

तीनो लोकों में छोटे बड़े , सब करते इनकी बढ़ाई है ,

जो काम सभी करते आये , हमको भी वही दोहराना है।

गणपति को प्रथम मनाना है……

कोई धृत सिन्दूर चढ़ाता है , कोई लडुवन का भोग लगाता है,

कोई मेवा थाल सजाता है ,कोई छप्पन भोग लगाता है ,

जिस भोग से खुश होते गणपति , हमको भी वही लगाना है।

गणपति को प्रथम मनाना है……

उत्सव में सभी पधारे हैं , बस इनका आना बाकी है ,

भक्त सभी मंगलाचार करे , इन्होने आने की हाँ की है ,

गणपति का नाच बड़ा प्यारा , उत्सव में आज नचाना है।

गणपति को प्रथम मनाना है……

गणपति को प्रथम मनाना है , उत्सव को सफल बनाना है ,

शिव पार्वती के प्यारे को , भगतों के बीच बुलाना है।

गणेश वंदना : 3

गणपति राखो मेरी लाज गणपति राखो मेरी लाज
पुरन कीजे मेरे काज पूरन कीजे मेरे काज।

तू भक्तों का प्यारा है सबका पालनहारा है
भयहारी दुखहारी तू करता मूषक सवारी तू
तू ही विघ्न-विनाशक है दीनजनों का रक्षक है
तेरा ही हम नाम जपें तुझको हम प्रणाम करें

सदा रहे खुशहाल गणपति लाल जो प्रथमें तुम्हे ध्यावे
गोरी पुत्र प्यारे जगत से न्यारे वो तुझसे सबकुछ पावे
तेरी दया का में मोहताज तेरी दया का में मोहताज

हे सम्भु के लाल प्रभु किरपाल में आया शरण तिहारी

हे गिरिजा के लाल प्रभु दिग्पाल तेरी है महिमा न्यारी
विनती सुनलो मेरी आज विनती सुनलो मेरी आज

गणपति राखो मेरी लाज पूरण कीजो मेरे आज

कभी न टूटे आस मेरा विश्वास,
मैं आया शरण तुम्हारी हे शंभू के लाल प्रभु किरपाल,
हे तेरी महिमा न्यारी,
तेरे दया का मैं मोहताज,
गणपति राखो मेरी लाज, पूरण कीजो मेरे काज।

जिसके सर पे हाथ तेरा हो नाथ उसे फिर कैसा डर है
जपे जो तेरा नाम सुबह और शाम तो उसका नाम अमर है, सब देवों के तुम सरताज ।

गणपति राखो मेरी लाज
पूरण कीजो मेरे काज।।

 

गणेश जी की वंदना 4

हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।

हर युग में सदा, हर काल सदा 
कण-कण शुभता का भाव भरे 
हर हाल गजानन साथ मेरे 
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।

जनम के पाप मेरे
तू सत्कर्मों से दूर करे
जन्मों का बिगड़ा भाग्य मेरा
तू पल भर में सौभाग्य भरे 
हर हाल गजानन साथ मेरे 
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।

हे गणनायक, सिद्धविनायक 
मेरे सब संताप हरे
भक्ति-भाव भर मेरे अंतर 
मन का तम, पलभर में हरे
हर हाल गजानन साथ मेरे 
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।

गौरी-पुत्र के संग शारदा 
माँ कमला भी साथ रहे
शिवशक्ति वरदान है तुझको
जग का सदा कल्याण करे 
हर हाल गजानन साथ मेरे 
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।

तुझको आज मनाते भगवन
हम-सब तेरे द्वार खड़े 
दर्शन दे दे आज गजानन
तू ही अब कल्याण करे
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे। 

– ‘सनातन’ कैलाश यादव

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