गणेश स्तुति से शीघ्र प्रसन्न होते है

हिंदू धर्म में गौरीशंकर पुत्र गणेश को सभी देवी-देवताओं से पहले पूजा जाता है | एकदंत गणेशा को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है |  तुलसीदास जी ने विनय पत्रिका में गणेश स्तुति लिखी है | इसे हर पूजा में पढ़कर गणेश जी को प्रसन्न करे और मनोकामना को पूर्ण करे |

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श्लोक :
ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्।
उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्॥


गणेश स्तुति

गणेश स्तुति

गणेश स्तुति :
गाइये गनपति जगबंदन।
शंकर सुवन भवानी नंदन 
गाइये गणपति जगबंदन ।

 सिद्धि-सदन, गज बदन, विनायक।
कृपा-सिंधु, सुंदर सब-लायक 
गाइये गणपति जगवंदन ।

मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता।
बिद्या-बारिधि, बुद्धि बिधाता
गाइये गनपति जगबंदन।

मांगत तुलसिदास कर जोरे।
बसहिं रामसिय मानस मोरे
गाइये गनपति जगबंदन।

देवता द्वारा की गयी गणेश स्तुति और हिंदी अर्थ

गणेश पुराण के अनुसार एक बार त्रिपुरासुर के अत्याचार से देवतागण दुखी हो उठे और उन्होंने गणेश जी स्तुति की | यह गणेश स्तुति सुनकर विनायक अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें उनके कष्टों से उभार दिया | यह महा शक्तिशाली और चमत्कारी गणपति वंदना है | इसे जो भी गणेश की पूजा में काम में लेंगे उन्हें जरुर सफलता मिलेगी |


नमो नमस्ते परमार्थरूप नमो नमस्ते अखिल करणाय।

नमो नमस्ते अखिलकारकाय सर्वेन्द्रियाणा मधिवासि ने पि ||

नमो नमो भक्त्मनोरथेश नमो नमो विश्वविधानदक्ष |

नमो नमो दैत्यविनाशहेतो नमो नमः संकटनाशकाय ||

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