भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि

चित्रगुप्त और उनकी पूजा विधि

चित्रगुप्त धर्मराज यमराज के सहायक देवता है जो अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते थे | भगवान चित्रगुप्त का जन्म ब्रह्माजी  के अंश से हुआ है।


कैसे हुआ चित्रगुप्त का जन्म

चित्रगुप्त के जन्म की कथा काफी रोचक है। जब यमराज ने अपने सहयोगी की मांग की, तो ब्रह्मा ध्यान में चले गए। उनकी एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद एक पुरूष उत्पन्न हुआ। इस पुरूष का जन्म ब्रह्मा जी की काया से हुआ था। इसलिए ये कायस्थ कहलाये और इनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।

पढ़े : दीपावली का पौराणिक महत्व और कहानी

चित्रगुप्त से जुडी बाते

चित्रगुप्त जन्मोत्सव

दिवाली के बाद भाई दूज दिन के साथ  साथ चित्रगुप्त भगवान की भी पूजा की जाती है .व्यापारी वर्ग  नए बहियों पर ‘श्री’ लिखकर कार्य प्रारंभ करते है . कायस्थ समाज चित्रगुप्त की पूजा करते है .


– घर में पूजा स्थान को अच्छे से साफ कर के एक चोकी पर कपड़ा बिछा कर भगवान  चित्रगुप्त जी की फोटो रखें.
– अब चोकी पर घी का दीपक जला कर पंचोपचार पूजन करे .
भगवान चित्रगुप्त की आरती और चालिसा का पाठ करे .
– अब परिवार के सभी सदस्य अपनी किताब, कलम की पूजा कर चित्रगुप्त जी के सामने रख दें.
– इसके बाद पहले पन्ने पर रोली से स्वस्तिक बना कर उस पर पुष्प और अक्षत चढ़ाये .

Other Similar Posts

मौत के देवता यमराज का मंदिर

महामृत्युंजय मंत्र की रचना कैसे हुई

अष्टधातु का महत्व और मिलने वाला लाभ

धर्म की परिभाषा ,अर्थ और महत्व क्या है

अमावस्या पर कौनसे काम नही करे , वरना होगा बड़ा नुकसान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.