कैसे करे भगवान की पूजा – जाने सही पूजा विधि

भगवान की पूजा की विधि

ईश्वर की पूजा करना जरुरी है क्योकि यह संसार और इसमे व्याप्त हर चीज उन्ही की देन है | हमारा जीवन मरण उन्ही के हाथो में है | आप चाहे किसी भी धर्म को मानने वाले हो आप किसी परम शक्ति में विश्वास करते है , चाहे आप उन्हें किसी भी नाम से पुकारे | व्यक्ति दो कारणों से भगवान की पूजा करता है | एक सुखद जीवन के लिए और एक उसके जीवन में अशांति और कठिनता के अभाव को कम करने के लिए | हमारे हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवी देवता बताये गये है जिसमे मुख्य पांच देवता निम्न है | सूर्य ,शिव ,दुर्गा, गणेश और विष्णु |


पढ़े : पूजा पाठ से सम्बंधित आलेख पूजा विधि

अलग अलग पूजन विधि

आप ईश्वर को सर्वव्याप मानकर किसी भी जगह उसकी पूजा कभी भी कर सकते है | पर हिन्दू धर्म में मंदिर , शिवालय और तीर्थ स्थलों को देवताओ का वास समझकर वहा पूजा करना ज्यादा सार्थक माना जाता है | आप किसी भी रूप में पूजा करे पर ध्यान रखे मन चंचल ना हो और आप अपनी पूजा में तन मन धन से डूब कर पूजा करे | आपकी पुकार आपके आराध्य तक जरुर पहुंचनी चाहिए |


दैनिक पूजन विधि में पूजन के छ: प्रकार बताये गये है |

1 पंचोपचार (5 प्रकार)
2 दशोपचार (10 प्रकार)
3 षोडशोपचार (16 प्रकार)
4 द्वात्रिशोपचार (32 प्रकार)
5 चतुषष्टि प्रकार (64 प्रकार)
6 एकोद्वात्रिंशोपचार (132 प्रकार)

इसमे हम दो मुख्य पूजा विधि के बारे में आपको बता रहे है |

पंचोपचार पूजा विधि

पूजा की वह विधि जिसमे भगवान की पूजा 5 प्रकार से की जाती है उसे पंचोपचार पूजन विधि कहा जाता है | इसमे अपने आराध्य का श्रंगार करके आरती नैवेद्य ( भोग ) अर्पित किया जाता है |

षोडशोपचार विधि

इस पूजा विधि में अपने भगवान की सोलह तरीके से पूजा अर्चन की जाती है | षोडशोपचार पूजा विधि को सबसे अच्छी पूजा विधि मानी जाती है | इसमे सबसे पहले देवता का ध्यान आह्वान करके उनकी हर तरीके से आवभगत की जाती है और अंत में आरती के बाद पुष्पांजलि समर्प्रित की जाती है |

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