अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं हनुमान जी श्लोक और अर्थ

यदि हनुमान जी की महिमा के बारे में जानना चाहिए तो यह 4 लाइन का श्लोक गागर में सागर की तरह बहुत ही अच्छे ढंग से इनकी महानता और वीरता को इंगित करता है |

अतुलित बलधाम श्लोक हिंदी अर्थ

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

padhe – हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज के जन्म की कथा

श्लोक का हिंदी अर्थ

अतुलित बल धाम – ऐसा बल जिसकी कोई तुलना नही करे , वो बल जो द्रौण गिरी को हिमालय से लंका 3 घंटे में हवा में उड़ा कर ले आये |

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हेमशैलाभदेहं – जिनका शरीर स्वर्णिम पर्वत के समान महा विशाल है |

दनुजवनकृशानुं – रावण की सेना में राक्षसों , दैत्यों के वन को आपने अग्नि बनकर स्वाहा कर दिया |

ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌ – ज्ञानियों में आप अग्रगण्य है क्योकि आपको सबसे बड़े परमार्थ सुख “राम ” की ही लालसा रही है | इसी कारण आप अजर अमर है | आपने अपने बुद्धि बल से कई बार राम लक्ष्मण पर आये संकट हर लिए |

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं – सम्पूर्ण गुणों आप में समाये हुए है और आप वानरों के स्वामी है |

रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि -श्री राम के प्रिय और भक्त हनुमान जी आपको और आपकी भक्ति को बारम्बार प्रणाम है |

हनुमान जी रूद्र के अंशावतार है जिनका जन्म ही राम कार्य को पूर्ण करने के लिए हुआ है | वह कार्य आज तक समाप्त नही हुआ और ना ही भविष्य में होगा | इसी कारण ये अष्ट चिरंजिवियो में से एक है | माता सीता से इन्होने वरदान प्राप्त किया है की प्रलय के अंत तक यह धरती पर रहकर श्री राम नाम का गुणगान करते रहेंगे |

अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता इन्हे गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरिमानस में बताया गया है | यह अष्ट सिद्धि सिर्फ दो ही देवताओ को प्राप्त है एक हनुमान जी और दुसरे गौरी सूत श्री गणेश जी |

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