होलिका दहन की पूजा कैसे करे

होलिका दहन प्रहलाद की भक्ति की शक्ति और भगवान विष्णु की कीर्ति की याद में मनाई जाती है | इस दिन सभी होलिका की पूजा करते है |

होलिका की पूजा में काम आने वाली सामग्री :

पवित्र जल का लोटा , कुमकुम , चावल , कच्चा सूत , मूँग , हल्दी गाठ , बताशे , नारियल पुष्प , गंध , गोबर के उपले  , नई फसल जैसे चने और गेहूं की बालिया |


होलिका दहन पूजा विधि
कैसे करे पूजा : पवित्र गंगा जल से पहले उस स्थान को शुद्ध करे | होलिका के चारो तरफ तीन या सात परिक्रमा करे और साथ में कच्चे सूत को लपेटे | ध्यान रहे यह समय भद्रा के बाद का ही हो |  पूजन करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा में हो | फिर लोटे के जल और अन्य पूजन सामग्री एक एक करके होलिका को अर्पित करे | विधि पंचोपचार की हो तो सबसे अच्छी है | पूजा में सप्तधान्य से भी पूजा की जाती है हो है  गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर।

पूजन करते समय होलिका को देखते हुए निम्न मंत्र बोले :

अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌


सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका में  सही मुहर्त पर अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी जाती है। अग्नि प्रज्ज्वलित होते ही डंडे को बाहर निकाल लिया जाता है। यह डंडा भक्त प्रहलाद का प्रतीक है |

होलिका के समय नयी फसले आने लग जाती है अत: इन्हे भी पूजन में विशेष स्थान दिया जाता है और होलिका की लपटों से इसे सेक कर घर के सदस्य खाते है  और धन धन और समृधि की विनती की जाती है |

होलिका के बाद बड़ो को गुलाल से तिलक लगाकर चरण स्पर्श किये जाते है | सब एक दुसरे को बुराई पर अच्छाई की जीत की शुभकामनाये देते है  |
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