भैरव जी के सिद्ध मंत्र

भैरव के मंत्र

भैरव रूद्र शिव के त्रिनेत्र की ज्वाला से जन्मे है | इनका जन्म अहंकार और असत्य के नाश के लिए हुआ है | ज्यादातर मनुष्य इन्हे रूद्र उग्र देवता के रूप में मानते है और पूजते है | पर इनका एक बहूत ही प्यारा और सोम्य रूप बटुक भैरव का भी है | भैरव के वैसे तो आठ रूप है जिसमे बटुक रूप एक चोदह पन्द्रह साल के बालक का है |

भैरव की प्रसन्नता के लिए श्री बटुक भैरव मूल मंत्र का पाठ करना शुभ होता है।

विपदा नाशक मंत्र

मूल मंत्र : ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं’।

मनोकामना पूरक मंत्र :

ॐ नमो भैरवाय स्वाहा

पाप विनोचक मंत्र :

ॐ ह्रीं बटुक ! शापम विमोचय विमोचय ह्रीं कलीं !!

मंगल दोष दूर करने के लिए भैरवजी का सिद्ध मंत्र

धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्!!
द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये!!!!

अन्य भैरव मंत्र :

ॐ भयहरणं च भैरव:

ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।

ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्‍

ऊं भं भैरवाय अनिष्ट निवारणाय स्वाहा

सभी मंत्र मानस जप से करने चाहिए जिसमे सिर्फ ह्रदय में ही मंत्र जपे | यह सबसे अच्छा तरीका है किसी भी मंत्र को जपने का |

अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि
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