गणेश जी के पाँच चमत्कारी मंत्र

भगवान श्री गणेश के मंत्र



भगवान श्री गणेश सभी सुख समृधि देने वाले देवता है जिन्हें पञ्च देवो में भी स्थान प्राप्त है | देवी देवताओ की असंख्य बार इन्होने रक्षा की है | गणेश पुराण तो यह तक कहती है तीनो त्रिदेवो के ये पूजनीय है | एक असुर ने जब तीनो त्रिदेवो पर अपना आतंक मचा लिया था तब गजानंद ने ही उन सभी की रक्षा की थी | यह बुद्धि के देवता और अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता है | एकदंत गणेश की महिमा अपरम्पार है | गणेश जी का विवाह रिद्धि सिद्धि के साथ हुआ और इनकी पत्नियाँ भी सम्पन्नता देने वाली है |

गणेश जी के मंत्रो से सर्व सुख सम्पन्नता :

भगवान श्री गणेश के यहा पाँच दिव्य और चमत्कारी मंत्र दिए जा रहे है | वैसे तो गणेश पूजा का सबसे बड़ा दिन गणेश चतुर्थी है जो जाप के लिए सबसे अच्छा है | इन मंत्रो का बुधवार या नित्य जाप से आप श्री गणेश के अति प्रिय पात्र बन जायेंगे और वे आपके सभी विध्नो को दूर करके आपको शांति समृधि प्रदान करेंगे | जाप के साथ यदि ये पाँच चीजे जो गणेश जी को अति प्रिय है भी प्रदान करे |


गणपति बप्पा के पाँच महा मंत्र

गणेश मंत्र कार्य को विध्न बिना पूर्ण करने के लिए

” ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ।। ”

बिगड़े काम सुधारने के लिए गणेश मंत्र :

” त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम् ।। ”

गणेश गायत्री मंत्र

ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्

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गजानंद एकाक्षर मंत्र
ऊँ गं गणपतये नमः ।।

परेशानियों को दूर करने के लिए

गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌

ग्रह दोष से रक्षा के लिए मंत्र
” गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।। ”
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