कैसे करे भैरव जयंती कालाष्टमी पर पूजा पाठ

भैरव की पूजा विधि – कालाष्टमी विशेष

मार्गशीर्ष मास की कृष्णपक्ष अष्टमी  (आठे) (  नवंबर / दिसम्बर  ) को भगवान शिव ने अपने त्रिनेत्र से इन्हे ब्रह्मा  का झूठा अहंकार खत्म  करने के लिए अवतरित किया था | इस साल 2019 में भैरव जयंती मंगलवार, 19 नवंबर को आ रही है |
bhairv jayanti
यह शिव के पांचवे अवतार ही है | यह दिन भैरव जयंती , भैरव जन्मदिवस , भैरव  अष्टमी  या कालाष्टमी के नाम से पूजा जाता है | इनकी मुख्य सवारी स्वान (कुत्ता ) है |



इस दिन भैरव की पूजा उपासना और व्रत करने से भैरव अति प्रसन्न होकर अपनी कृपा की वर्षा करते है | दिन भर व्रत रखे रात्रि में जागरण करे | किसी नजदीकी भैरव मंदिर में जाकर एक सरसों के तेल का दीपक जलाये और काले तिल और उड़द भेंट करे | रात्रि में  जागरण काल में शिव पार्वती की भैरव कथा जरुर सुननी चाहिए और भैरव के 108 नाम का  जाप करना चाहिए | आस पड़ोस के कुत्तो को भी अच्छे भोज कराये और भैरव को प्रसन्न करे |

भैरव का साप्ताहिक दिन :

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भैरव का प्रिय दिन मंगलवार और रविवार का बताया गया है | इस दिन भैरव पूजा करने से भूत प्रेत बाधा दूर होती है | शत्रु बाधा दूर करने में भी भैरव पूजा जल्दी फलदायी है | इनका मुख्य शस्त्र दंड है अत: इन्हे दंडपति के नाम से भी जाना जाता है |

भैरव के पसंदीदा  भोग :

काले उड़द , काले गुलाब जामुन , मदिरा , मांस , काले तिल  , लाल अनार , कटहल आदि

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