गया का विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला – 17 दिन के मेले में आते है लाखो लोग

गया का विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला

Pitra Paksh Fair Festival In Gaya Dham 

धार्मिक शास्त्रों में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष में पिंडदान , तर्पण , ब्राह्मण भोज और दान का महत्व बताया गया है | 16 दिन के श्राद्ध पक्ष में मृत्यु के देवता यमराज पितृ लोक का दरवाजा खोल देते है जिससे की पितृ अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सके | दिवंगत पूर्वजनो की आत्मा की संतुष्टि के लिए मोक्षधाम गया जी का अत्यंत महत्व है | यहा पितृ पक्ष में 17 दिन का महा मेला भरता है जिसमे देश विदेश से लाखो भक्त अपने पूर्वजो की आत्मा की शांति के लिए यहा आते है |


पितृ पक्ष मेला गया धाम

पढ़े : सर्व पितृ अमावस्या का पितरो के लिए महत्व

 

जिस तरह नदियों में गंगा सबसे पवित्र है वैसे ही पूर्वजो कि शांति के लिए तीर्थ धामों में गया सबसे उत्तम माना गया है | यहा पितृ पक्ष में बहुत सारे श्रद्दालु दूर दूर से आते है | अत: अब इसने मेले का रूप धारण कर लिया है |

श्राद्ध के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी की जा सकती है |

कैसा रहेगा पितृ पक्ष का मेला

मेले क्षेत्र में सैकड़ो CCTV कैमरे लगाये गये है जिससे कि मेले कि निगरानी अच्छे से रखी जा सके | लोगो कि तादाद को देखते हुए 16 स्वास्थ्य केन्द्रों का भी निर्माण किया गया है | जगह जगह मेले से जुड़े बैनर और बोर्डिंग लगाये गये है |


शहर के 21 स्कूल बाहर से आने वाले लोगो के रहने के लिए काम में लिए जा रहे है | इसके कारण 15 हजार स्टूडेंट्स को २० दिन कि छुट्टी दे दी गयी है |

 gya shradh

दशरथ ने पुकारा था श्री राम को यहा

इस मोक्षधाम का सम्बन्ध रामायण की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है | लंका विजय के बाद जब श्री राम ,सीता और लक्ष्मण अपने पुष्पक विमान से अयोध्या लौट रहे थे | बीच में बिहार का गया धाम जब आया , तब वहा स्तिथ पहाड़ी में से उन्हें आवाज आई कि पुत्र राम , तुम गया कि मोक्षदायिनी नगरी से मेरा श्राद्ध कर मुझे मोक्ष कि प्राप्ति करवाओ |

तब श्री राम ने सीता संग दशरथ जी का पिंडदान करवाया था |

गया का नामकरण गयासुर से

gyasur rakshashपुराणों के अनुसार गया में गयासुर नाम के एक राक्षस ने घोर तपस्या करी थी | इस कारण उसके नाम पर गया का पवित्र तीर्थ स्थल बन गया | गया राक्षस की पीठ पर एक विशाल शीला को रखा गया है जिसे प्रेत शीला कहा जाता है | यहा जो व्यक्ति श्राद्ध के दिनों में हवन , पूजा और श्राद्ध करते है , उनके पूर्वजो को मोक्ष कि प्राप्ति होती है |

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