पितरो को विदाई

पितरो की विदाई

पितृ विदाई

पितृ पक्ष में सम्पूर्ण सम्मान देने के बाद पितरो को पूर्ण आदर भाव से श्रद्धापूर्ण विदाई की जाती है | विदाई वाला दिन सर्व पितृ अमावस्या की रात्रि मानी जाती है | इनके नाम से दीपदान ज्योति से इन्हे खुशी खुशी विदा किया जाता है |

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श्राद्ध पक्ष में पहले ही आपको पितरो का तर्पण , ब्राह्मण भोज और पितृ पक्ष पूजा विधि जैसे  कार्य पूर्ण कर लेने चाहिए |

विधि अनुसार किसी नदी तट पर इनके नाम से चौदह दीप जलाकर उन्हें बहते पानी में छोड़ दिया जाता है |

और उन्हें याद करके विदा किया जाता है |

ध्यान रहे आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर हो और जाने अनजाने कोई गलती हुई हो तो उसकी माफ़ी मांग ले |

अपने और अपने परिवार के मंगलमय आशीष मांगे |

यदि आस पास में नदी नही हो तो यह कार्य आप पीपल के पेड़ पर भी कर सकते है | पीपल के पेड़ के निचे भी आप चौदह दीप प्रज्वलित कर अपने पितरो से भूल चुक माफ़ी मांगे और आशीष की कामना करे |

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