मंदिरों में चरणामृत का महत्व

चरणामृत की महिमा

चरणामृत का क्या महत्व है? चरणामृत दो  शब्दो  चरण +अमृत से मिलकर बना है , इसका सीधा सा अर्थ है ईश्वर के चरणों को स्पर्श करने वाला जल जो अब उनके पैरो के स्पर्श से अमृत बन गया है | हम मंदिरों में यही चरणामृत प्राप्त करते है जो मंदिर में देवी देवताओ के चरणों को धुला कर भक्तो को […]

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सबसे बड़ी पतिव्रता अनुसूईया

त्रिदेव बह्रमा विष्णु महेश ने पिया दूध

यह एक पौराणिक प्रसंग है जो सती अनुसूईया के चरित्र की महिमा का गुणगान करता है | सती अनुसूईया अपने पतिधर्म और पतिव्रता के लिए जानी जाती थी | तीनो लोको में उनके इस धर्म की कीर्ति का बख्यान होता था | देव ऋषि नारद जी को तो आप जानते है , अपने स्वभाव वस उन्होंने  अनुसूईया की यह महिमा […]

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भगवान विष्णु का कल्कि अवतार कलियुग में

कलियुग में कल्कि अवतार विष्णु

कलियुग और कल्कि अवतार ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है की कलियुग में एक समय ऐसा आएगा जब मनुष्य कु उम्र औसत 40 वर्ष ही रह जाएगी | 16 वर्ष की उम्र में आते आते बाल सफ़ेद हो जायेंगे | तब भगवान विष्णु का फिर एक अवतार कल्कि अवतार होगा | यह तो हम भी देख रहे है की जैसे […]

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गणेश लक्ष्मी की पूजा एक साथ क्यों

गणेश लक्ष्मी पूजा एक साथ क्यों

क्यों गणेश लक्ष्मी की पूजा एक साथ की जाती है ? आपने दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश का पूजन किया होगा | पर आपने कभी सोचा है की विष्णु जी की जगह पर गणेश जी का लक्ष्मी के साथ पूजा क्यों की जाती है ? जब मंदिरों में राधे कृष्णा , शिव पार्वती , सीता राम की साथ […]

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पीपल की महिमा और पूजन विधी

पीपल पेड़ की महिमा

भारत के सनातन धर्म में पीपल की महिमा बहूत ही अनुपम में | यह पेड़ो का राजाधिराज कहलाता है | इसके मूल भाग में बह्रमा , मध्य में विष्णु और अग्र भाग में शिव निवास करते है | कुछ विशेष त्यौहार में इसकी या इसके पत्तो से पूजा करना अनिवार्य बताया है | शास्त्रों के अनुसार पीपल की विधि पूर्वक […]

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कृष्णा ने पीया राधे के चरणों से चरणामृत

कृष्णा ने पिया राधे का चरणामृत

चरणामृत की महत्ता और शक्ति का इस पौराणिक कथा से भी ज्ञान होता है की जब खुद भगवान को अपने परम भक्त का चरणामृत लेना पड़ा था | एक बार गोकुल में बाल कृष्णा बीमार पड़ गये थे | कोई हाकिम वैद दवाई जड़ी-बूटी उन्हें ठीक नही कर पा रही थी | जब गोपियाँ उनसे मिलने आई और उनकी ऐसी […]

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शिव पार्वती का तीसरा पुत्र अन्धक जो एक दैत्य था

शिव पार्वती दैत्य पुत्र अन्धक

यह प्रसंग बताएगा की क्यों शिवजी और पार्वती  के दैत्य पुत्र अंधक ने जन्म लिया और किस कारण शिवजी ने अपने इस पुत्र का वध किया | आइये जाने ………. एक बार शिवजी पूर्व दिशा में मुंह करके बैठे हुए थे , तभी पीछे से पार्वतीजी ने अपने हाथो से शिवजी की आँखे बंद कर दी और इस तरह पल […]

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रावण की पुत्री सीता के पीछे का सच्च

रावण सीता की पुत्री

रामायण के ऊपर दुनियाभर के विद्वान अध्ययन कर रहे है | बहुत सारी रामायणे ( लगभग 100 से ऊपर ) भी लिखी गयी है जिसमे महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण मुख्य है | अदभुत  रामायण में रावण और सीता का संबंध पिता पुत्री का बताया गया है | हालाकि वाल्मीकि रामायण इस बात के ऊपर कोई सच्चाई नही डालता | […]

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बिहार में गया तीर्थ की महिमा

गया तीर्थ का धर्म में महत्व

बिहार की राजधानी पटना से करीब 104 किलोमीटर की दूरी पर बसा है गया जिला। धार्मिक दृष्टि से गया न सिर्फ हिन्दूओं के लिए बल्कि बौद्ध धर्म मानने वालों के लिए भी आदरणीय है। बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे महात्मा बुद्ध का ज्ञान क्षेत्र मानते हैं जबकि हिन्दू गया को मुक्तिक्षेत्र और मोक्ष प्राप्ति का स्थान मानते हैं। – इसलिए […]

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क्यों होते है माला में 108 दाने – 108 का महत्व

108 का महत्व माला में

हिन्दू धर्म में 108 संख्या का धार्मिक महत्त्व अत्यधिक है , चाहे माला के दाने हो या किसी संत के नाम के साथ 108 , 1008 जैसी संख्या बहूत मायने रखती है | पर कभी आपने इसके पीछे के कारणों का धार्मिक और वैज्ञानिक मत समझा है | आइये आज इस पोस्ट से जानते है इसके पीछे के गूढ़ रहस्य […]

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