पाताल भैरवी मंदिर जहा है 108 फीट का शिवलिंग

पाताल भैरवी मंदिर

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग पर नागपुर जाने की दिशा में स्थित संस्कारधानी जगह पर  मां पाताल भैरवी का मंदिर आस्था का अनुपम केंद्र बना हुआ है | यहा पाताल भैरवी की रौद्र रूपी प्रतिमा 15 फीट ऊँची है और यह जमीन में 16 फीट की गहराई में है | साथ ही भगवान शिव पूजा का मुख्य प्रतिक शिवलिंग 108 फीट ऊँचा है | यह मंदिर अपने आप में किसी चमत्कार से कम नही है |


patal bhairavi temple

प्रसाद ग्रहण से हो जाता है रोगमुक्त
Raipur patal bhairvi idolयहा का प्रसाद विशेष है जो स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है | इससे कई रोगों का ईलाज होता है जैसे र दमा, श्वांस संबंधी बीमारी, अस्थमा आदि | प्रसाद में काम आने वाली सामग्री हिमालय से लाई गई जड़ी-बूटी से तैयार की जाती है | फिर भोग अर्पण के बाद यह निशुल्क भक्तो में वितरित की जाती है |


पुराणों के आधार पर मंदिर की स्थापना

आपने एक फोटो देखी होगी जिसमे मातारानी के साथ काशी के कोतवाल भैरव और हनुमान जी के दर्शन मिले होंगे | इसी पौराणिक प्रसंग पर इस महा मंदिर का निर्माण किया गया है |  जमीन के नीचे गर्भग्रह में मां पाताल भैरवी विराजित है।  । मंदिर के द्वितीय तल में देवी लोक के रूप में दश महाविद्या स्थापित है जो  वृत्ताकार आकार में में है | तृतीय तल में द्वादश शिवलिंग व पारे के शिवलिंग (पारद) व भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित है।

108 फीट का शिवलिंग और विशालकाय नंदी

Patal-Bhairavi-Templeइस मंदिर की एक और विशेषता है की यहा एक भवन क पीछे सहारा लेते हुए एक भव्य शिवलिंग का निर्माण किया गया है जो 108 फीट की ऊंचाई का है | इस शिवलिंग के सामने एक अन्य छोटी इमारत पर शिव वाहन नंदी विराजमान है | दोनों को देखना धार्मिक रूप से मन को अति शांति प्रदान करता है | यह शिवलिंग और नंदी दोनों के भव्य रूप देखना अलग ही आनंद देने वाला पल होता है |

मंदिर स्थापना और कार्यक्रम
बर्फानी दादा के मार्गदर्शन में मंदिर की स्थापना 4 अप्रैल 1998 में की गई। स्थापना के पीछे उद्देश्य यह था कि संस्कारधानी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

इसी उद्देश्य के तहत सबसे पहले मां पाताल भैरवी की प्रतिमा स्थापित की गई और देखते ही देखते जन सहयोग से विशाल मंदिर तैयार हो गया। आज देश के कोने कोने से भक्तो और साधू संतो का यहा आना जाना लगा रहता है । नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। माता रानी की ज्योत के साथ कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है |

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