लिंगाई माता मंदिर

लिंगाई माता मंदिर




शिव व शक्ति के समन्वित स्वरूप को लिंगाई माता के नाम से जाना जाता है । यह की देवी माँ शिवलिंग के रूप में पूजी जाती है | यह मंदिर छत्तीसगढ़ के दुर्गम इलाको में आलोर गाँव की गुफा में स्तिथ है। यह जगह नक्सलवाद के कारण शिव भक्तो से अपरिचित है पर स्थानीय लोगो के लिए यह किसी ज्योतिर्लिंग से कम नही है |

साल में बस एक दिन ही खुलता है यह मंदिर :

इस मंदिर की विशेषता है की यहाँ रोज पूजा अर्चना ना होकर पुरे साल में बस एक ही दिन मंदिर को खोला जाता है | हजारो श्रद्धालु लिंगाई माता के इस शिवलिंग के दर्शन करने के लिए कतारों में लगे रहते है |


इस दिन भारी मेला भरता है | संतान प्राप्ति की कामना की जाती है |
प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष नवमीं तिथि के पश्चात आने वाले बुधवार को इस प्राकृतिक मंदिर को भक्तो के लिए खोला जाता है |

मंदिर से जुडी दो मुख्य मान्यताये :

यहा मंदिर से जुडी दो मुख्य मान्यताये है जिनसे पहली देवी माँ का संतान के रूप में प्रसाद देना और दूसरा भविष्य दर्शन |

पहली मान्यता में यहा लिंगाई माता को खीरे का भोग लगाया जाता है उसके बाद बचा प्रसाद पति पत्नी को खाना पड़ता है | जब उनके संतान हो जाती है तब उन्हें अपनी श्रद्दा अनुसार इस मंदिर में दान पुण्य करने पड़ते है |
दूसरी मान्यता यह है की यह भक्तो के भविष्य की बात बताता है | यह रेत पर बनी शेप से भविष्य दर्शन किया जाता है |

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