मौत के देवता यमराज का मंदिर

मौत के देवता यमराज का मंदिर

भारत श्रद्दा और भक्ति का देश है | यहा विविध तरह के भक्त है और उनके आराध्य भी अलग अलग है | आज हम जिस मंदिर की बात करने वाले है वो किसी देवता का नही बल्कि मौत के सौदागर यमराज का है | यहा यमराज अपने सहायक चित्रगुप्त के साथ विराजमान है |

शास्त्रों में बताया गया है की चित्रगुप्त हर व्यक्ति के कर्मो को लेखा जोखा सँभालते है और उसके अनुसार ही उस व्यक्ति के मरने के बाद उसके आगे की अच्छी या बुरी यात्रा शुरू करते है |

यमराज के अलावा धर्मराज भी है इनका नाम :

बहुत सारे लोगो को नही पता की यमराज का एक अन्य नाम धर्मराज है |

यह तो इस संसार का सबसे बड़ा सच्च है की जो आया है वो जायेगा | इस संसार से ले जाने का कार्य यमराज को सौपा गया है | मौत के बाद यह उस आत्मा को उसके कर्मो के अनुसार आगे की यात्रा शुरू करते है इसी कारण इन्हे धर्मराज भी कहा जाता है |

कहाँ है यमराज का यह मंदिर :


दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान में स्थित  है यह  मंदिर | इस मंदिर में एक खाली कमरा है जिसमे चित्रगुप्त को यमराज के साथ बैठा बताया जाता है |

मंदिर को लेकर अनोखी मान्यता :

इस मंदिर को लेकर लोगो की एक प्रबल मान्यता है की प्राणी की मृत्यु  के बाद यमराज के दूत उसे इसी जगह सबसे पहले लेकर आते है फिर चित्रगुप्त उसके कर्मो का लेखा देखकर उसे स्वर्ग या नरक का मार्ग दिखाते है | इसे यमराज की कचहरी  कहा जाता है |

मदिर के अन्दर जाने से डरते है लोग : शायद यह ऐसा पहला मंदिर है जिसके अन्दर जाने से डरते है लोग | पर यह डर है मौत का | मौत के देवता के दर्शन करना लोगो को जरुर भयभीत करता है | इसी कारण कुछ लोग तो बाहर से ही अपनी सलामती की दुआ मांग कर लौट जाते है |

अन्य यमराज के मंदिर भारत में :

इसके अलावा भी यमराज के अन्य मंदिर भारत में है जिनमे है तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्तिथ श्री ऐमा धर्मराज टेम्पल

ऋषिकेश में धर्मराज मंदिर

विश्राम घाट – मथुरा में भाई बहिन ( यमराज और यमुना )  मंदिर

उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे  रामघाट के पास धर्मराज का मंदिर है |

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