किलकारी भैरव मंदिर दिल्ली

भैरव मंदिर दिल्ली

दिल्ली में भैरव बाबा (भैरों ) का मंदिर

किलकारी भैरव मंदिर भगवान शिव के पंचम अवतार भैरव को समर्प्रित है | भारत में सबसे बड़ा भैरव मंदिर  काशी  भैरव मंदिर को बताया गया है क्योकि वे काशी के कोतवाल नियुक्त किये गये है |  यह मंदिर महाभारत कालीन है जिसे भीम द्वारा स्थापित किया बताया जाता है | भीम ने यहा विशेष पूजा अर्चना करके भगवान भैरव से कई सिद्धियाँ प्राप्ति की थी |

यह मंदिर दिल्ली के प्रगति मैदान के आगे पुराने किले ( पांडवो का किला ) के पास स्थित है |  यह पर्यटकों के लिए विशेष स्थान रखता है | पुरे साल भर हजारो यहा दर्शन करने आते है | रविवार का दिन भैरव का विशेष दिन माना जाता है अत: इस दिन भक्तो की अपार भीड़ दर्शनार्थ आती है |

भैरव के मंदिर बनने की महाभारतकालीन कथा :

युधिष्ठिर ने कौरवो से युद्ध जितने के बाद एक महा शिवलिंग की स्थापना करना चाहा पर दानवीय शक्तियों ने इसमे अनेको विध्न डाले तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कशी के कोतवाल भैरव से सहायता लेने की युक्ति बताई |

भैरव से जब पांडवो ने आग्रह किया तब महाबलशाली भैरव तैयार हो गये और भीम के कंधे पर बैठकर  हस्तिनापुर आने लगे | रास्ते में इसी जगह पर किसी भ्रह्म वश भैरव जी को यही उतार दिया | भीम ने पुनः भैरव जी को कंधे पर बैठने का निवेदन किया पर भैरव ने माना कर दिया और कहा की वो अब इसी जगह रहेंगे साथ में यह विश्वास दिलाया की तुम  हस्तिनापुर से भी मुझे सच्चे मन से याद करोगे तो मैं सहायता करने पल भर में आ जाऊंगा | बस तब से इस पुराने किले के पास यह भैरव मंदिर है | बाद में पांडवो ने यहा आकार भैरव का पूजन किया और आज जन जन इस मंदिर में पूजा करने आते है |

मंदिर की बनावट :

यह मंदिर पूरी तरह उत्तरी भारत मंदिर निर्माण शैली में बनाया गया है | मंदिर की बनावट में सफेद मार्बल का प्रयोग किया गया है | मंदिर में देवी देवताओ को भी मार्बल से बनाया गया है |
मुख्य भैरव की प्रतिमा में सिर्फ भैरव का मुख ही है जिनके बड़ी बड़ी आँखे  है | यहा भी उज्जैन के काल भैरव की तरह मदिरा का प्रसाद भैरव जी को अर्पित किया जाता है |

मंदिर की समय तालिका :

रविवार : सुबह 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक

अन्य दिन : सुबह 5 से 12 फिर दोपहर 3 से रात्रि 10 बजे तक |
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