चर्चों और बीचों के शहर गोवा में है ये प्रसिद्ध शिव मंदिर

गोवा के चर्चो के बीच में एक हिन्दू मंदिर भगवान शिव के अवतार मंगेश को समर्प्रित है | यह प्राचीन समय से और शिव धाम है जिससे जुड़ी कई रोचक बाते यहा बताई जा रही है | मंदिर  गोवा की राजधानी पणजी से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पर स्‍थित है। बताते हैं पोंडा क्षेत्र में मोंगरी पहाड़ी के बीच बना यह मंदिर 18वीं शताब्दी में बनाया गया था।


पढ़े : शिवलिंग के उत्पति की कथा – कैसे उत्पन्न हुआ शिवलिंग

पढ़े : भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय

मंगेश रूप में पूजे जाते है शिव

मंगेश भगवान शिव का ही एक रूप हैं जो गौड़ सारस्वत ब्राह्मणों के कुलदेवता या आराध्य देव के रूप में पूजे जाते हैं। उन्‍हीं का एक मंदिर गोवा में मंगेशी मंदिर के नाम से मौजूद है जहां भगवान शिवलिंग के रूप में स्‍थापित हैं। अपने समुद्र तटों और गिरजाघरों के लिए मशहूर गोवा में आप इस प्राचीन शिव मंदिर के भी दर्शन हो सकते हैं। इस मंदिर को श्री मंगेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और

goa mangesh lord shiva temple

मंदिर की की गयी रक्षा

पुर्तगाली धर्मान्तरण के समय गोवा में अनेक हिन्दू मन्दिरों को तोड दिया गया था।


इससे बचने के लिए भगवान मंगेश के भक्तों ने लिंग (भगवान शिव का प्रतीक) मूल मंदिर से हटा कर आधी रात में प्रियोल के वर्तमान स्थल पर स्थानान्तरित कर दिया जो आदिल शाह के अधिकार क्षेत्र में था।

देवता का यह स्थानान्तरण सन् 1560 में हुआ। पेशवा राज्य के एक महत्वपूर्ण अधिकारी रामचंद्र सुखठणकर ने सोंडे के राजा से मंदिर के परिसर की भूमि को ले कर मंदिर को दे दिया।
स्थानान्तरण के बाद मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार मराठा शासन काल में दो बार हुआ और तीसरी बार सन् 1890 में हुआ। अन्तिम संशोधन सन् 1973 में हुआ जब मन्दिर के विशाल गुम्बज के शीर्ष पर एक स्वर्ण-कलश रखा गया।mangesh temple goa

बेहद सुंदर है मंदिर की बनावट

मंगेशी मंदिर की वास्तुकला विशेष है। यह मंदिर गोवा के ही एक अन्य मंदिर शांतादुर्गा मंदिर की शैली में बना है। यहां एक पानी का कुण्ड भी है। मंदिर के सभी स्तम्भ पत्थर के बने हैं और इसके मध्‍य में एक भव्य दीपस्तंभ भी है। मुख्य कक्ष में सभा गृह भी है। यह मंदिर दिनभर दर्शन के लिए खुला रहता है और हर सोमवार यहां एक महाआरती भी की जाती है।

पालकी यात्रा है विशेष आकर्षण

शिव के सोमवार की पूजा के बाद मंदिर से  पालकी पर प्रतिमा की यात्रा भी निकाली जाती है। माघ महीने जनवरी  में यहां जात्रोत्सव या यात्रोत्सव का भी आयोजन होता है। हजारो भक्त इस यात्रा में शामिल होते है और भव्य जुलुस का आयोजन किया जाता है |

Other Similar Posts

नागवासुकी मंदि‍र प्रयाग जहा किया जाता है कालसर्प दोष दूर

क्यों शिव के सिर पर चंद्रमा दिखाई देता है

कमलनाथ महादेव मंदिर जहा शिव से पहले होती है रावण की पूजा

कैसे करे असली रुद्राक्ष की पहचान

कैसे करे सावन के सोमवार का व्रत और जाने पूजा विधि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.