कमलनाथ महादेव मंदिर , झाडौल -शिव से पहले होती है रावण की पूजा

कमलनाथ महादेव मंदिर – झाडौल – यहां भगवान शिव से पहले की जाती है रावण की पूजा

राजस्थान में झीलों की नगरी उदयपुर से लगभग 80 किलोमीटर झाडौल तहसील में आवारगढ़ की पहाड़ियों एक ऐसी धार्मिक जगह है जिसका सम्बन्ध त्रेता युग से जुड़ा हुआ है | इस स्थान पर ही शिव के परम भक्त लंकापति रावण ने घोर तपस्या की थी | शिव को प्रसन्न करने के लिए उन्होंने यज्ञ में अपने शीश को काटकर आहुति तक दे दी थी | शिव ने प्रसन्न होकर रावण की नाभि में अमृत कुण्ड स्थापित किया  | तब रावण ने भगवान शिव को समर्प्रित शिव मंदिर का निर्माण करवाया जिसे हम कमलनाथ महादेव के नाम से जानते है |


कमलनाथ महादेव मंदिर

विशेष मान्यता 

इस मंदिर की सबसे बड़ी और विशेष मान्यता है की कमलनाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा स्तुति से पूर्व दशानन रावण की पूजा की जानी चाहिए | तभी आपकी पूजा पूर्ण मानी जाती है |


पढ़े : भगवान शिव के जन्म की कहानी 

कथा – क्यों पड़ा मंदिर का नाम कमलनाथ मंदिर

धर्मशास्त्रो में इस मंदिर को लेकर एक पौराणिक कथा आती है | एक बार लंकापति रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए इस स्थान पर सौ कमल के फूलों के साथ पूजन करने लगते है | ऐसा करते-करते रावण को साढ़े बारह साल लग जाते है ।  रावण की आस्था और भक्ति देखकर देवताओ को भय हो जाता है की वे जल्दी ही महादेव को प्रसन्न कर उनके नुकसान के लिए कोई वर मांग लेंगे | वे सभी उनके तपस्या में विध्न डालने के लिए ब्रह्मा जी से विनती करते है |

ब्रह्मा जी रावण का एक कमल पुष्प गायब कर देते है | जब रावण को एक पुष्प की कमी दिखती है वो पूजा को पूर्ण करने के लिए तलवार से अपना शीश काटकर शिव जी को अर्पित कर देते है | ऐसी आस्था देखकर शिवजी उन्हें दर्शन देते है और उसकी नाभि में अमृत कुण्ड की स्थापना कर देते है |

इसी पौराणिक कथा के कारण इस मंदिर का नाम कमलनाथ और पूजा शिव और उनके भक्त रावण की होती है |

अन्य मान्यता

पहाड़ी पर मंदिर तक जाने के लिए आप नीचे स्तिथ शनि महाराज के मंदिर तक तो अपना साधन लेके जा सकते है पर आगे का 2 किलोमीटर का सफर पैदल ही पूरा करना पड़ता है। इसी जगह पर भगवान राम ने भी अपने वनवास का कुछ समय बिताया था।

झालौड़ में यहा जलती है सबसे पहले होली  :

हल्दी घाटी के युद्ध के पश्चात  सन 1577  में  महाराणा प्रताप ने होली जलाई थी। उसी समय से समस्त झालौड़ में सर्वप्रथम इसी जगह होलिका दहन होता है। आज भी प्रतिवर्ष महाराण प्रताप के अनुयायी झालौड़ के लोग होली के अवसर पर पहाड़ी पर एकत्र होते है जहाँ कमलनाथ महादेव मंदिर के पुजारी होलिका दहन करते है। इसके बाद ही समस्त झालौड़ क्षेत्र में होलिका दहन किया जाता है।

Other Similar Posts

कैसे करे असली रुद्राक्ष माला की पहचान

ऐसे 4 शिवलिंग जिनका बढ़ रही है हर साल लम्बाई

धन लाभ के लिए करे ये शिव पुराण के बताये गये उपाय

शिव पुराण कथा से जुड़े मुख्य 10 नियम और बाते

प्रदोष व्रत कथा विधि नियम उद्यापन से जुडी जानकारी

शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.