क्यों करवाया जाता है तुलसी जी का विवाह

क्यों करवाया जाता है तुलसी का विवाह शालिग्राम के संग

Tulsi Shaligram Vivah Story On Dev Uthani Ekadashi

गणेश का श्राप वृंदा  को

प्राचीनकाल में भगवान विष्णु की की एक महान भक्त लड़की ने जन्म लिया जिसका नाम वृंदा था | यह लड़की भगवान विष्णु की भक्ति में ही लगी रहती है और अटूट विश्वास और निष्ठा से उनकी पूजा अर्चना करती थी | एक बार यह जंगल से गुजर रही थी तो इन्हे तपस्या में लीन गणेश जी के सुन्दर दर्शन हुए | गणेश जी को इन्होने विवाह प्रस्ताव रखा पर गणेशजी ने इन्हे साफ साफ़ मना कर दिया | इन्होने गणेश जी को श्राप दे दिया और फिर भगवान गणेश ने भी इन्हे दैत्य के साथ विवाह होने का श्राप दे दिया |

पढ़े पूरी कहानी : क्यों नही चढ़ती गणेश जी के तुलसी

दैत्य के साथ विवाह

गणेश जी के इस वचन के कारण वृंदा का विवाह दानव राज जालंधर के साथ हुआ | वह बड़ी पतिव्रता नारी थी और अपने पति के प्राणों की रक्षा के लिए ढाल बनी हुई थी | जब भी जालंधर किसी महायुद्ध में जाता , उसकी पत्नी वृंदा उसकी रक्षा के लिए पूजा पाठ करती | इसी कारण दैत्य जालंधर सभी जगह अपराजित रहता |

देवताओ की चिंता पर विष्णु ने किया कपट

पतिव्रता शक्ति के आगे देवतागण चिंतित हो गये और भगवान विष्णु की शरण में गये | विष्णु ने छल द्वारा वृंदा की पतिव्रता को भंग करने की युक्ति निकाली | एक बार जब जालंधर युद्ध के लिए बाहर गया हुआ था और वृंदा पूजा पाठ में लगी हुई थी तब विष्णु जालंधर का वेश बनाकर उनके पास आ गये |
tulsi vivah shaligram ji
अपने पति को देख वह उनके साथ आनंद क्रीडा करने लगे और अपने पतिव्रता शक्ति को नष्ट कर बैठी | उधर जालंधर कमजोर हो गया और देवताओ ने उसका शीश काट दिया | यह सिर वृंदा के महल में आकर गिरा | वृंदा यह देखकर चौंक सी गयी | तब भगवान विष्णु ने अपने दर्शन दिए | सारी बात और छल के बारे में जानकर पतिव्रता नारी वृंदा ने विष्णु को श्राप दिया की आप पत्थर के हो जाओ और अपनी स्त्री से वियोग सहो | श्राप के कारण वे शालिग्राम जी में बदल गये |

लक्ष्मी की विनती पर पुनः रूप पाया

माँ लक्ष्मी और देवताओ की विनती पर वृंदा ने फिर से भगवान विष्णु को उनकी मूल रूप दे दिया |

वृंदा हो गयी सती और बनी तुलसी

वृंदा ने अपने मरे हुए पति के सिर को उठाया और सती हो गयी | इस राख से तुलसी जी का पौधा उत्पन्न हुआ | विष्णु भगवान ने इस पौधे का नाम तुलसी रखा |

विष्णु ने दिया वरदान

तुलसी विवाह शालिग्राम
और कहा की तुम्हारे दिए गये रूप ( शालिग्राम ) से मेरा विवाह तुलसी के साथ हर साल कार्तिक मास में देव उठनी एकादशी पर धूम धाम से मनाया जायेगा | तुम विष्णु प्रिय रहोगी | बिना तुम्हारे मेरी पूजा अपूर्ण होगी |

यही कारण है की माँ तुलसी जी और भगवान विष्णु का विवाह रचाया जाता है | जाने कैसे तुलसी जी का विवाह करवाया जाता है |

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