क्यों तामसिक प्याज और लहसुन व्रत में नही खाए जाते

क्यों प्याज और लहसुन को व्रत में नही खाया जाता

Pyaj Or Lahsun Ko Kyo Samjha Jata Hai Tamsik

हिन्दू धर्म में भोजन के तीन प्रकार बताये गये है , सात्विक , राजसिक और तामसिक | इसमे जो तीसरा प्रकार तामसिक का है उसमे प्याज और लहसुन को रखा गया है | यह अत्यंत दुर्गन्ध देने वाली और कामवासनाओ को बढ़ाने वाले खाद्य माने गये है | दन्त कथाओ में इन्हे असुर के खून से उपजा हुआ बताया गया है |

तामसिक प्याज और लहसुन

पढ़े : हिन्दू सनातन धर्म से जुडी पौराणिक कथाये और कहानियाँ

दन्त कथा प्याज और लहसुन की

देवता और असुर जाति  जब समुन्द्र मंथन कर रही थी तब उसमे से एक अमृत कलश निकला | विष्णु जी ने मोहिनी रूप धारण कर असुरो के साथ छल करके अमृत देवताओ को पिलाने लगे पर एक असुर विष्णु जी की माया को समझ गया और रूप बदलकर देवताओ में बैठ अमृत पीने लगा | विष्णु जी को जब उसकी सच्चाई पता चली तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उसका शीश धड से अलग कर दिया | पर अमृत पान करने के कारण राहु केतु के रूप में दो भाग अमर हो गये | विष्णु द्वारा राहू के सिर काटे जाने पर उनके कटे सिर से अमृत की कुछ बूंदे ज़मीन पर गिर गईं जिनसे प्याज और लहसुन उपजे।

तामसिक पर स्वास्थ्य के लिए अच्छी क्यों है ये

चूंकि यह दोनों सब्ज़िया अमृत की बूंदों से उपजी हैं इसलिए यह रोगों और रोगाणुओं को नष्ट करने में अमृत समान होती हैं पर क्योंकि यह राक्षसों के मुख के लहू से उत्पन्न हुई है इसलिए यह तेज गंध वाली और तामसिक है । इन्हे कभी भी भगवान के भोग में काम में नही लिया जाता है |

कहा जाता है कि जो भी प्याज और लहसुन खाता है उनका शरीर राक्षसों के शरीर की भांति मज़बूत हो जाता है लेकिन साथ ही उनकी बुद्धि और  सोच-विचार राक्षसों की तरह दूषित भी हो जाते हैं। इन दोनों सब्जियों को मांस के समान माना जाता है।

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