आंवले के पेड़ की उत्पति कैसे हुई – पौराणिक कथा

कहानी – आंवले का  पेड़ कैसे उत्पन्न हुआ

Story behind birth of Phyllanthus emblica (Amla Tree)

कार्तिक मास की शुक्ल नवमी पर आंवले की पूजा अक्षय नवमी (आंवला नवमी ) के रूप में की जाती है |


पूर्वकाल में समस्त संसार जब जलविलीन था तब ब्रहमाजी प्रब्रह्मा के ध्यान में मगन थे | भगवत ध्यान में उनके आगे का श्वास निकला और फिर भगवत दर्शन की कामना और ख़ुशी में उनकी आँखों से आंसू निकल गये | यह आंसू की बूंद पृथ्वी पर गिरी और इसने आंवले के पेड़ का रूप ले लिया |

कैसे जन्मा आंवले का पेड़

इस वृक्ष से कई शाखाये और उपशाखाये  निकली | समस्त ब्रह्माण्ड में सबसे पहले पेड़ो में आंवले के पेड़ (Phyllanthus emblica) ही उत्पन्न हुआ अत: इसे आदिरोह के नाम से भी जाना जाता है | इस पेड़ के बाद ही ब्रह्मा जी ने मनुष्य और देवताओ को उत्पन्न किया था |

पढ़े : आंवला नवमी की कहानी – आंवले के दान से मिला हर सुख

यही पेड़ भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है | इसे सभी पेड़ो में सबसे उत्तम बताया गया है |

आंवले के पेड़ की पूजा से शिव और विष्णु की होती है पूजा

हम सभी जानते है भगवान विष्णु को तुलसी का पौधा अत्यंत प्रिय है तो महादेव शिव को बिल्व  का पेड़ | इन दोनों पेड़ो के गुणों का मिश्रित रूप आंवले का पेड़ है | अत: इस पेड़ की पूजा से शिव और विष्णु की पूजा का फल प्राप्त होता है | यह सार स्वयं माँ लक्ष्मी ने बताया था |

 

आंवले का धार्मिक महत्व – Religious Beliefs on Amla Tree

इस पेड़ की महिमा इतनी बड़ी है कि इस पेड़ के स्मरण मात्र से ही गोदान का फल प्राप्त हो जाता है | इसके दर्शन से दुगुना और इसके फल को खाने से तिगुना फल मिलता है | इस पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते है और समस्त कामनाओ की पूर्ति होती है |

amla tree

शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास की नवमी और चतुर्दशी को इस पेड़ के निचे आंवले की महिमा की कथा सुनता है , इसी पेड़ के निचे भोजन करता है उसका बहुत कल्याण होता है | कार्तिक मास में हर संध्या आंवले के पेड़ के निचे दीपदान करने से उसके जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है |

आंवले के पेड़ के निचे किया गया दान कोटि गुना पुन्य देने वाला होता है |

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