श्रापित नदी जिसके पानी को छूने से खत्म हो जाता पूण्य ?

अपवित्र और शापित नदी कर्मनाशा की पौराणिक कहानी

Story behind  About The Cursed KarmanasaRiver

सनातन धर्म अत्यंत प्राचीन और गौरवपूर्ण है | यहा बहुत सारी चीजो के साथ पौराणिक कहानियाँ जुडी हुई है |


हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवी देवताओ के साथ प्रकृति के विभिन्न भाग को भी पूजनीय बताया गया है | इसमे पवित्र और धार्मिक पहाड़ , धार्मिक नदियाँ , पवित्र और पूजनीय पेड़ और पूजनीय जीव जंतु सम्मिलत है | यही बाते इस हिन्दू धर्म को सनातनी और महान बनाती है |

पढ़े :- हिन्दू सनातन धर्म से जुडी पौराणिक कथाये

shapit nadi karmnasha

धार्मिक शास्त्रों में इनके पीछे बहुत सारी कहानियाँ बताई गयी है | पर आज हम एक ऐसी नदी की बात करने वाले है जिसे श्रापित बताया जाता है | यहा तक की इस नदी के पानी को छूने वाला व्यक्ति अपने पूण्य तक खो देता है | ऐसा मानना इस नदी के पास रहने वाले व्यक्तियों का है | धार्मिक शास्त्रों में भी इस नदी को मिले श्राप के बारे में उल्लेख मिलता है |

कौनसी नदी है शापित

कर्मनाशा नाम की यह नदी बिहार के कैमूर जिले से निकलती है और उत्तर प्रदेश से होकर निकलती है | हालाकि यह नदी गंगा की सहायक है फिर भी इसके दोष कम नही है |यह बक्सर के पास गंगा में विलीन हो जाती है |


किस कारण श्राप लगा इस नदी को

शास्त्रों के अनुसार राजा हरिश्चंद्र के पिता और सूर्यवंशी राजा त्रिवंधन के बेटे सत्यव्रत, जो त्रिशंकु के नाम से प्रसिद्ध हुए थे हुए। वे स्वर्ग में जीवित ही  जाना चाहते थे पर गुरु वशिष्ठ ने उनके मना कर दिया | त्रिशंकु ने गुरु की आज्ञा का पालन नही किया | इस पर  वशिष्ठ के पुत्रों ने त्रिशंकु को चंडाल होने का श्राप दे दिया।

trishunk raja

त्रिशंकु नाराज होकर महर्षि विश्वामित्र के पास गये और उन ऋषि ने उन्हें सशरीर स्वर्ग भेज दिया | यह बात देवताओ को प्रिय नही लगी और उन्होंने उनके उल्टा लटकाकर फिर से धरती प्रशेपित कर दिया  |

उल्टे लटके राजा त्राहिमान करने लग गये और उनके मुख से लार गिरने लगी जिसने कर्मनाशा नदी का रूप ले लिया | इस कारण यह नदी देवताओ के रोष के कारण उत्पन्न हुई और शापित कहलाई |
श्राप का प्रभाव

इस नदी के किनारे पर रहने वाले कभी इस नदी का जल स्पर्श नही करते है | वे सूखे मेवे खाकर जीवन जीते है | कहते है यदि इस नदी में बाढ़ आ जाये तो यह नर बलि लेकर ही शांत होती है | इस नदी का जल यदि किसी हरे भरे पेड़ को छू ले तो वो भी सुख जाता है | ऐसा इस नदी के शापित होने वालो का मानना है |अब इस नदी के इन प्रभावों में कितनी सच्चाई है यह तो आत्मबीती वाला व्यक्ति ही बता सकता है |

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